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shivani j

Others

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shivani j

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पहेली

पहेली

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मैं बंधी हूँ या आज़ाद

कुछ समझ नहीं आता।

एक आवाज़ परेशान करती है मुझे

वो अंधेरे से आती है या मेरे दिल से 

कुछ समझ नहीं आता।


बोझ तो था,

वो जो बरस पड़ा वो दिल था या आसमा 

कुछ समझ नहीं आता।

वो जो पिंजरे में पंछी है उसे चाहत दाने

की है या आसमा की।

कुछ समझ नहीं आता 

मैं बंधी हूँ या आज़ाद कुछ समझ नहीं आता।



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