shivani j
Tragedy
क्या ये संभव है...
जो साथ हो, वो साथ न हो
पत्थर पत्थर जोड़
पर दिल के करीब दीवार न हो?
क्या ये संभव है?
गहरी लंबी नींद आए
पर ये काली रात न हो?
क्या ये संभव ...
कहानी वही पुर...
पहेली
दिल
जाना नहीं
कसूर
कोशीश
कौन हूँ मैं ?
ख़्वाब
शहर की आब-ओ-हवा है ठीक नही तुम अभी आना नही। शहर की आब-ओ-हवा है ठीक नही तुम अभी आना नही।
हर प्राणी बेचैन है, धरती हुई अधीर। इंद्रदेव कर के कृपा, बरसा दो कुछ नीर।। हर प्राणी बेचैन है, धरती हुई अधीर। इंद्रदेव कर के कृपा, बरसा दो कुछ नीर।।
यही फलन है जब नवपीढ़ी आँसू से सन जाती है सहिष्णुता जब हद से बढ़ती कायरता बन जाती है ... यही फलन है जब नवपीढ़ी आँसू से सन जाती है सहिष्णुता जब हद से बढ़ती कायरता बन जाती ह...
है वही दिन,रात का रोना। वही दरके हुए गाने, वही रूठा जमाना। है वही दिन,रात का रोना। वही दरके हुए गाने, वही रूठा जमाना।
आज जब सदियों की खोज के बाद उसने ढूंढ़ लिया है 'ना ' शब्द। आज जब सदियों की खोज के बाद उसने ढूंढ़ लिया है 'ना ' शब्द।
यह शहर है यह रोने की जगह नहीं है। यह शहर है यह रोने की जगह नहीं है।
पंक्तियों की प्रेरणा बेच दी जब जाती है, वह रमणी कोठे पर रात भर वीर्य से नहाती है। पंक्तियों की प्रेरणा बेच दी जब जाती है, वह रमणी कोठे पर रात भर वीर्य से नहात...
एक शिकायत है तुझसे माँ,क्यों मुझे ब्याह दिया विदेस? एक शिकायत है तुझसे माँ,क्यों मुझे ब्याह दिया विदेस?
दूर देश से बेशकीमती,नक्काशीदार पिंजरा मंगवाया। दूर देश से बेशकीमती,नक्काशीदार पिंजरा मंगवाया।
भर जाता तलवार का घाव, शब्दों का नहीं भरता है, शब्दों से मिले ज़ख्मो का, कहांँ कोई मरहम। भर जाता तलवार का घाव, शब्दों का नहीं भरता है, शब्दों से मिले ज़ख्मो का, कहांँ...
गज़ब गज़ब की बातें सुनी है उन्ही बातों में एक खास बात सुनी। गज़ब गज़ब की बातें सुनी है उन्ही बातों में एक खास बात सुनी।
मम्मी मैं क्या सच मे मर गई हूं जो आप लोग मेरे सारे कपड़े खुशी को देने चले गए थे ? मम्मी मैं क्या सच मे मर गई हूं जो आप लोग मेरे सारे कपड़े खुशी को देने चले गए थे ?
सर्वाधिक महत्वपूर्ण है पुस्तक का वह पृष्ठ, जहां मुद्रित पुस्तक का अधिकतम खुदरामूल्य। सर्वाधिक महत्वपूर्ण है पुस्तक का वह पृष्ठ, जहां मुद्रित पुस्तक का अधिकतम खुदर...
माँ ने अपनी कृपा प्रसाद से मुझे भरपूर अभिभूत कर दिया। माँ ने अपनी कृपा प्रसाद से मुझे भरपूर अभिभूत कर दिया।
काव्य कुसुम कानन में कविता, कलुषित हुई कहो कैसे? काव्य कुसुम कानन में कविता, कलुषित हुई कहो कैसे?
कितनी ही कामनाएं मसली है मैंने अपने कोमल हृदय पर खिलखिलाती। कितनी ही कामनाएं मसली है मैंने अपने कोमल हृदय पर खिलखिलाती।
शिकायत थी उनकी कि हम उन्हें मिलते नहीं। तो बन के खुशबू उनके बदन की महका जाये। शिकायत थी उनकी कि हम उन्हें मिलते नहीं। तो बन के खुशबू उनके बदन की महका जाये।
देखो उस पृथ्वी का मानव ने आज यह कैसा हाल किया है? देखो उस पृथ्वी का मानव ने आज यह कैसा हाल किया है?
आज मैं गाँव से लौटा हूँ। मन में गहन पीड़ा लिए बैठा हूँ। आज मैं गाँव से लौटा हूँ। मन में गहन पीड़ा लिए बैठा हूँ।
दुख की चादर ओढ़े कौन खड़ा है वो समय समय का फेर है बदल रहा है जो। दुख की चादर ओढ़े कौन खड़ा है वो समय समय का फेर है बदल रहा है जो।