STORYMIRROR

Neetu Lahoty

Abstract

3  

Neetu Lahoty

Abstract

दिल से

दिल से

1 min
218

ख़ुशी तुझमें ही छिपी है कहीं 

खुश रहने के लिये सिर्फ

सोच बदल कर देख 


जो तेरे मुकद्दर में है उसे

कोई छीन नहीं सकता 

जो तेरी किस्मत में नहीं

उसे तू पा नहीं सकता 


कर्म करना नियति है हमारी 

फल मिले न मिले वो हरी इच्छा 

मन माफिक हो तो अच्छा 

मन माफिक न हो तो और भी अच्छा 


कल पर बस न तेरा न मेरा 

उसको सोच सोच कर ये

आज क्यों बिगाड़ दें अपना 

अलहदा फ़ितरत है तेरी मेरी 

फिर भी जीने को तू ही ज़रूरी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract