दिल न मचल जाए
दिल न मचल जाए
चलती हवा का तेज झोंका भी
तुझे छूने से न जाने क्यों कतराए
उसे डर है कि कहीं तेरे खूबसूरत चेहरे पर
तेरे जुल्फों का कोई पर्दा न बन जाए,
सूरज की चमकती तेज किरणें भी
तेरे पास आने से न जाने क्यों घबराए
उसे भी शायद यही डर है कि
तेरे होठों से कोई आह न निकल जाए,
फूलों की उन नाजुक कलियों को
अगर तेरे छूने से ही ताजगी मिल जाए
तो मुझे डर लगता है कि कहीं
तेरी नाजुक कलाइयों में कोई मोच न आ जाए,
बारिश कि वो रिमझिम - रिमझिम बूंदे
तुझ पर बरसने से ही मुकर जाए
उसे डर है कि तेरे भीगे बदन की खुशबू से
कहीं वो मदहोश न हो जाए,
तेरे रास्तो के वो कंकड पत्थर
तेरे रहो में आने से शर्मा जाए
उसे दुःख होगा तेरे नाजुक पैरों के नीचे आने से
तेरे पैरों मे कहीं कोई लचक न आ जाए,
बन ठन के इतराती इठलाती हुई
जब ऊंची - नीची पगडंडियों मे अपने कदम बढ़ाए
मुझे फिक्र है तेरे लिए इस बात की
कि कहीं किसी का दिल न मचल जाए।

