STORYMIRROR

Poonam Shukla

Tragedy

3  

Poonam Shukla

Tragedy

धरती का दुःख

धरती का दुःख

1 min
157

धरती मेरी कितनी सुंदर रंगों से भरी हुई है,

पेड़ पौधे शोभा बढ़ाते

पंक्षी करते भ्रमण यहाँ और अपनी गीत सुनाते

सूर्य और चन्द्रमा अपनी चमक बिखेरते

तारे करते टिम टिम टिम

बारिश होती रिमझिम रिमझिम

मानव घूमते थे मस्त मग्न


पर अचानक एक दिन लगा

कोरोना महामारी का ग्रहण

पूरी धरती में फैला सन्नाटा लगा

जैसे हँसते चेहरे पर किसी ने

अचानक मारा चाटा

सभी देख बीमारी का ऐसा

चेहरा लगाने को

विवश हुए अपने मुँह मे

मास्क का सेहरा

अब लगता है ईश्वर ही इस

धरती को फिर से हँसायेगा

शायद अपने ही हाथों से इस

दहशत वाले सेहरे को हटायेगा

एक बार फिर करो उद्धार

धरती का हे ईश्वर

ये प्रार्थना करता है जग सारा।। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy