धरती का दुःख
धरती का दुःख
धरती मेरी कितनी सुंदर रंगों से भरी हुई है,
पेड़ पौधे शोभा बढ़ाते
पंक्षी करते भ्रमण यहाँ और अपनी गीत सुनाते
सूर्य और चन्द्रमा अपनी चमक बिखेरते
तारे करते टिम टिम टिम
बारिश होती रिमझिम रिमझिम
मानव घूमते थे मस्त मग्न
पर अचानक एक दिन लगा
कोरोना महामारी का ग्रहण
पूरी धरती में फैला सन्नाटा लगा
जैसे हँसते चेहरे पर किसी ने
अचानक मारा चाटा
सभी देख बीमारी का ऐसा
चेहरा लगाने को
विवश हुए अपने मुँह मे
मास्क का सेहरा
अब लगता है ईश्वर ही इस
धरती को फिर से हँसायेगा
शायद अपने ही हाथों से इस
दहशत वाले सेहरे को हटायेगा
एक बार फिर करो उद्धार
धरती का हे ईश्वर
ये प्रार्थना करता है जग सारा।।
