STORYMIRROR

Poonam Shukla

Abstract

4  

Poonam Shukla

Abstract

समय

समय

1 min
99

 समय की धारा बहती जाए

नहीं लेती कभी वह विराम

समय पे जो सब कुछ करे


उसे मिले आराम ही आराम

समय के आगे झुक जाते हैं

जितने बड़े वह महान

समय से बड़ा कुछ भी नहीं


वही है सबसे बलवान

समय चक्र से पीस जाते है

राजा हो या कोई फकीर

समय पे करवट लेते हैं


जो लिखी हुई भाग्य की लकीर

समय ही दुखद चुभन है

फिर वही तो सुख और चैन

समय ही मृत्यु और काल है

फिर वही मैत्री और अमन


समय के साथ चलना सीखे

जीवन ही हो जाएगा आसान

समय का सदुपयोग करे

बने एक अच्छा सा इंसान। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract