STORYMIRROR

Bhavna Thaker

Tragedy

4  

Bhavna Thaker

Tragedy

ढूँढ लेना मुझे

ढूँढ लेना मुझे

1 min
335

बस एक ही पहचान है मेरी

कुछ कुछ असर छोड़ जाऊँगी 

कलम की नोक पर बैठे अल्फाज़ 

मेरे अपने एहसासों की आवाज़ है


पन्नों की महक में सिमटा मेरा

अस्तित्व पढ़ लेना 

जब कभी मैं ना रहूँ

सताए जो कभी याद मेरी


वैसे  

मुझसे वाबस्ता तुम्हारी कोई 

और चाह तो नही फिर भी

मैं कुछ और ना सही 

एक नाम तो हूँ 


कहीं मिलूँ ना मिलूँ

मेरी कविताओं में नज़र आऊँगी 

तुम्हारे प्रति चाहत के

भिन्न भिन्न रंग में बिखरी


गूँजते होंगे मेरे बोल हर पन्नों पर 

रूठते रिसते मनाते 

तुम्हारी शख़्सीयत को सँवारते

किसी दिशा से कोई शायद गुनगुनाए 


मेरी उस कविता में मुझको ढूँढ लेना

समझ लूँगी 

किसी और जहाँ में बैठे भी

सार्थक रहा मेरा लिखना

इतना तो यकीन है मैं रहूँ ना रहूँ 

लिखावट में मेरी महक तो रहेगी


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy