Bhavna Thaker
Classics
कायनात की किसी शै में अमृत नहीं मिलेगा !
वो बैठा है प्रेमियों के अधरों पर लहलहाता।
पूछो पहले चुम्बन की मोहर लगी
माशूका से मिठाश का मर्म,
शर्माते लबों पर उसका जीभ का रगड़ना
अमृत के उद्भव की सुनहरी गाथा कहेगा।
शून्य थी मैं
सुकून से रह
नहींईईईई
रात की सौगात ...
अमृत की गाथा
मोहताज क्यूँ ...
एहसास को स्पर...
मोहिनी के मान...
कहाँ कुछ ज़्य...
मज़ा मिलना चा...
हम सँभल गए ,पता नहीं है आजकल।। पर ये भी कोई ख़ता नहीं है आजकल।। हम सँभल गए ,पता नहीं है आजकल।। पर ये भी कोई ख़ता नहीं है आजकल।।
प्यार से रिश्ता जोड़ लो, तुम प्यार की भाषा को जान लो।। प्यार से रिश्ता जोड़ लो, तुम प्यार की भाषा को जान लो।।
दो कदम ही सही तुम भी, मेरे संग चल कर देख लो ।। दो कदम ही सही तुम भी, मेरे संग चल कर देख लो ।।
बीती यादों की किताब में नए सुखद किस्से लिखूँगी। बीती यादों की किताब में नए सुखद किस्से लिखूँगी।
खड़ा जहाँ हूँ आज हम सभी अभी जहाँ इन मित्रता ने है वह मुकाम दिलाई।। खड़ा जहाँ हूँ आज हम सभी अभी जहाँ इन मित्रता ने है वह मुकाम दिलाई।।
नफरत भरने न कोई दिल मेें इंसान को इंसान तो होने दे नफरत भरने न कोई दिल मेें इंसान को इंसान तो होने दे
वो सियाही कितनी खूबसुरत होगी जब तेरे महंदी रचे हाथो से नाम तेरा मेरा साथ में लिखा जाय वो सियाही कितनी खूबसुरत होगी जब तेरे महंदी रचे हाथो से नाम तेरा मेरा साथ में...
भूमिजा पुनः भूमि में समा गयी कैसी थी ये माया।। भूमिजा पुनः भूमि में समा गयी कैसी थी ये माया।।
रुक जाते हैं तुम्हें देख कर तुम नए नए से लगते हो।। रुक जाते हैं तुम्हें देख कर तुम नए नए से लगते हो।।
स्कूल टाइम मस्ती भरा टाइम, दोस्तों के साथ शरारतों के सागर में गोते लगाने का टाइम। स्कूल टाइम मस्ती भरा टाइम, दोस्तों के साथ शरारतों के सागर में गोते लगाने का ट...
मोहब्बत का महीना आया मोहब्बत भूल अप्रैल फूल बनाया। मोहब्बत का महीना आया मोहब्बत भूल अप्रैल फूल बनाया।
रोज़ ही तो तुझे लिखती हूँ तुझे में पन्नों पर फिर क्यूँ तू रोज़ याद आता है। रोज़ ही तो तुझे लिखती हूँ तुझे में पन्नों पर फिर क्यूँ तू रोज़ याद आता है।
अपनी इसी पावन धरा पे, धर्म का संचार हो। अपनी इसी पावन धरा पे, धर्म का संचार हो।
लगता है हम भूल रहे हैं, चलो देेखते हैं, चलो देखते हैं।। लगता है हम भूल रहे हैं, चलो देेखते हैं, चलो देखते हैं।।
साथ चलते रहे आखिर तक, लेकिन आप में कभी ना मिले। साथ चलते रहे आखिर तक, लेकिन आप में कभी ना मिले।
ये शिला पाषाण चीखें काट देती धार कोमल।। ये शिला पाषाण चीखें काट देती धार कोमल।।
माना तुझे मोहबत नहीं है मुझसे पर कभी नफरत नहीं करना। माना तुझे मोहबत नहीं है मुझसे पर कभी नफरत नहीं करना।
उसे भला बाबुल का आँगन अब कहाँ सुहाता है ! उसे भला बाबुल का आँगन अब कहाँ सुहाता है !
यहीं पले थे राम कृष्ण जन जन के मानस पर जो छाए।। यहीं पले थे राम कृष्ण जन जन के मानस पर जो छाए।।
'सुओम' तो दीवाना है आदत का। अभी एक नई पहचान बाकी है।। 'सुओम' तो दीवाना है आदत का। अभी एक नई पहचान बाकी है।।