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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

दास्तां

दास्तां

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गमों से भरी दास्तां 

कांटों से भरा रास्ता

जिंदगी का खौफ नहीं

सीने में दर्द पालता।


बहुत खूब जिसको चाहा

अलबत्ता वही रहा प्यारा 

बेवफाई का भले हो नजारा

जिंदगी ने उसे उम्र भर को संवारा।


किस्मत का राग निराला है

जो किस्मत में नहीं,

वो नहीं मिलता है

लाख चाहो शिरकत


कोशिशों का अंजाम

उभरता हुआ सितारा है।


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