चाहत के कितने महल
चाहत के कितने महल
चाहत के कितने महल
चाहत के कितने महल
तुमने बनवाए है
मुकम्मल इश्क के
कितने ख्वाब तुमने सजाये है
शबनम कि कितनी बूंदे
चाहत के आंगन में आके बरस गई
इसको कितनी बार देखा है तुमने
अभी तो सावन आया है
इसी सावन के आने में
कितने मुस्कुराहट के मोती
हासिल किये तुमने

