शब्दों में
शब्दों में
कितना कठिन हो जाता है
तुम्हें शब्दों में लिख पाना
मुझे वह शब्द ढूंढ़ने पडते है
जिस में मैं लिख सकता हूँ तुम्हें सुकून से
क्या उस तितली के पास
होंगे रेशम से शब्द तुम्हारे लिए
नहीं,वो नहीं मिलेंगे
क्या,उस घने कोहरे दरख्त में
वो शब्द मिलेंगे
नहीं ,मिलेंगे
आखिर उस समन्दर की गहराई में
क्या, वो शब्द के मोती मिल पाएंगे
शायद,नहीं
चंद्रमा के उजाले के सुकून में
क्या मैं ढूँढ़ पाऊँगा वो शब्द
नहीं, मिलेंगे
सच तो यह है की,
वो शब्द जिसमें
मैं तुम्हें लिखना चाहता हूँ
वो तुम्हारे ही पास है
अब वहीं शब्द तुमसे लेकर
मैं तुम्हीं को लिखूँगा
तुम्हारे शब्दों में जीवनभर

