STORYMIRROR

Anil Pandit

Drama Fantasy Inspirational

4  

Anil Pandit

Drama Fantasy Inspirational

भावनाओं के अरण्य में……

भावनाओं के अरण्य में……

1 min
1

भावनाओं के अरण्य में……

देखा जो एक अश्रु वृक्ष

उसके पर्ण जीर्ण होकर बिखरने लगे थे ,

वो वृक्ष जो अश्रु बहाता था,

उसका दर्द, उसकी सिसकियाँ, उसकी चीख,

दूर के एक पहाड़ को टकराकर चूर चूर  हो जाती थी

पर उसे सुनने वाला कोई नहीं था ,

उसका एकांत ही उसका साथी था, हमदर्द था

 

भावनाओं के अरण्य में…….

एक परिंदा उड़ाता फिरता रहता था

वो चाहता था आजादी अपने ही ग़मों से ,

 

भावनाओं के अरण्य में…….

बहता झरना था ख्वाहिशों का

वो ख्वाहिशें जो किसीको मालूम नहीं

ना ही  कभी मालूम होगी

 

भावनाओं के अरण्य में…….

अश्रु बहता वृक्ष…..

आजादी चाहता परिंदा ….

ख्वाहिशों का झरना…..

और भी बहुत कुछ है

इसी अरण्य में शामिल होगें ,

और कई भावनाओं के अस्तित्व के किनारे

 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama