अपनी ही दुनिया में…..
अपनी ही दुनिया में…..
अपनी ही दुनिया में रहता है वो
पता नहीं कैसे मस्त जिंदगी जीता है वो
बंद करके गम दिल की अलमारी में
हमेशा मुस्कुराते मिलता है वो
फर्क़ नहीं पडता उसे
तन्हा रास्तोपर अकेला ही चलता है वो
ये जो जुगनू आके बताते है बातें
उनकी बातों को नज़रंदाज नहीं करता है वो
सब्र का पेड़ लगया हो उसने जैसे
सब्र से ही मुश्किलें हल करता है वो
अपनी ही दुनिया में रहता है वो
पता नहीं कैसे मस्त जिंदगी जीता है वो
दुनिया की फितरत से वाकिफ है वो
इसलिए अपनी ही दुनिया में मशगूल रहता है वो
