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कुमार अविनाश केसर

Classics

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कुमार अविनाश केसर

Classics

चाह

चाह

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तुमसे चाहा-

थोड़ा -सा प्यार...

अँजूरी भर दुलार....

तुमने कीमत लगा दी!

दिल में दीमक लगा दी।


तुमसे चाहा -

पल भर मनुहार..

नज़रों की फुहार...

तुमने हँसी उड़ा दी!

ज़माने की नज़रें दिखा दी।


तुमसे चाहा -

चाँदनी-सी छुअन..

मखमली मानस भुवन...

तूने पानी में आग लगा दी!

रेगिस्तान में प्यास जगा दी।


काश !

मुझसे भी कभी चाहे होते -

सिर के लिए कंधे..

आँखों के लिए बहार ...

मन के लिए बहलाव ....

और......

और बहुत कुछ....

जो तुम्हारी सोच से परे हो।


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