बयान करुं
बयान करुं
कब तक मै इंतजार करुं तुझे मिलने का?
तेरे न मिलने से मन मायूस बन जाता है।
कब तक मेरे नसीब में लिखा है तडपने का?
तुझे देखने के लिये मेरे नैना तरस जाते है।
क्या करुं मै तेरे इश्क में वीरह की आग का?
मेरा दिल आग में जलकर राख बन जाता है।
कब तक मै ख्वाब देखा करुं तेरे मिलन का?
तेरे ख्वाब से मेरी रातें सूनसान बन जाती है।
किस लफ्ज़ो में बयान करुं तेरी कमीयों का?
"मुरली" लिखकर मेरी कलम थक जाती है।
रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)

