STORYMIRROR

Dimple Dadsena

Drama

3  

Dimple Dadsena

Drama

बरसात आई

बरसात आई

1 min
307

काले बादल उमड़ पड़े हैं आसमान में

धरती की पुकार सुनी है आसमान ने।

नभ की छटाएँ देखकर,

आओ मगन हो जायें इस बरसात में।


मन मोरनी बनाकर नाच लें,

आओ इस बरसात में।


बच्चों के जीवन को देखो,

नहीं है उनमें बैर की भावना।

अन्तर नहीं छोटे-बड़े का,

स्वार्थ की भी नहीं कामना।


इन बच्चों सा आनंद उठा लें,

आओ इस बरसात में।

मन मोरनी बनाकर नाच लें,

आओ इस बरसात में।


बरस रही पानी की बूँदें,

सबकी प्यास बुझा जाती हैं।

सारे जीवों के चेहरे पर,

मीठी मुस्कान जो ले आती है।


सारे गम हम दूर भगा लें,

आओ इस बरसात में।

मन मोरनी बनाकर नाच लें,

आओ इस बरसात में।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama