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Dr Lalit Upadhyaya

Drama

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Dr Lalit Upadhyaya

Drama

बरगद की छांव

बरगद की छांव

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गलियों में खेले गिल्ली डंडे,

वहां थे हम भले चंगे,


बहुत देखे हमने शहर के दंगे,

गंजो को भी हमने बेचे कंघे।


याद आता है गांव,

बरगद की वो छांव,


नदी में चलती नाव,

खेत में काम करने का चाव।


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