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Vivek Agarwal

Classics

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Vivek Agarwal

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भूमिजा

भूमिजा

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भूमिजा


वसुधा के गर्भ से प्रकट हुई तो भूमिजा कहलायी।

गौरी माँ के आशीर्वाद से प्रभु रामचंद्र से ब्याही।।


कुटिल कैकई के वचनों से श्रीराम गये वनवास।

दशरथ भी स्वर्ग सिधारे छूटी जीवन की आस।।


छद्म वेश धारण कर रावण ने किया सिया-हरण।

घोर पाप कर उसने किया निश्चित निज मरण।।


पवन पुत्र हनुमान ने तब माता का पता लगाया।

पावक पूँछ में धारण कर पूरी लंका को जलाया।। 


सेतु बना सौ योजन की जल निधि कर ली पार।

भीषण युद्ध छिड़ा लंका में हुआ रावण का संहार।।


पुष्पक विमान ले आकाश मार्ग से लौटे सीता राम।

चौदह वर्षों के बाद पुनः पावन हुआ अयोध्या धाम।।


राज धर्म की रक्षा हेतु सीता को फिर राम ने त्यागा।

अग्नि परीक्षा दी थी फिर भी जग में विश्वास न जागा।।


लव-कुश जैसे पराक्रमी पुत्रों को राम से मिलवाया।

भूमिजा पुनः भूमि में समा गयी कैसी थी ये माया।।


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