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अनजान रसिक

Romance Classics Inspirational

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अनजान रसिक

Romance Classics Inspirational

भारत माता की जय

भारत माता की जय

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गणतंत्र दिवस की इस स्वर्णिम बेला पर संविधान के प्रति सजगता और प्रतिबद्धता का संकल्प पुनः लेते हैं हम,

रग रग में कर्त्तव्य घोलने का फिर से आज निश्चय करते हैं हम।

वन्दे मातरम के राग सत्यनिष्ठा व सच्चे ह्रदय से गुनगुनाते हैं हम,

यें हवाएं रोज़ हमारे कर्णोँ में गुनगुनाती हैं, थोड़ी सी अपनी भी संसानहट इन में आज छोड़ते हैं हम।

रास सीना की पहाड़ी से शेरे बिगुल चलो आज बजाते हैँ हम,


नगाड़ों की ध्वनि व शँखनाद के संग जन-गण-मन के सुर लगाते हैं हम।

अपने शहीदों को पुनः याद करके कभी आंसू छलका जाते तो कभी गर्व से सीना चौड़ा करते हैँ हम,

ओस्जमई तिरंगे को अपने शिखर पर लहराता देख लाल किला मंद मंद मुस्काता है,इस लम्हे का लुत्फ़ उठाते हैँ हम।

हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक,बंगाल से महाराष्ट्र तक अब यें सुर ना थमने पायेगा,

बिगुल आज जो बजा है हर सीने में, क्रांति पुनः वो सर्वत्र फैला कर जाएगा।


अपना कायदा, अपना कानून, अपनी व्यवस्था, अपने नियम लागू  करे थे इस दिन,

उन सब का पूर्ण श्रद्धा से अनुसरण करने का पुनः खुद से वादा करता है हर दिल।

सोने की चिड़िया की धरोहर की सुरक्षा का पुनः प्रण लेते हैं हम,

आज़ादी मिली बहुत संघर्ष के पश्चात,इसका रंग और निखारने का प्रण लेते हैँ हम।


संविधान के नियमों के प्रति सजगता, राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्तवों को भली-भांति निभाएंगे हम,

गर्व से चौड़ा सीना हों जाएं मां भारती का, फिर कुछ ऐसा कर के दिखाएंगे हम।

जिन अधिकारों से शक्ति मिली है हमको, उनका अनुकरण सदा करते हुए झंडे की शान बधाएंगे हम,

व्यवस्था देश की ना मिटने पाए, इसकी अखंडता ध्वस्त ना होने पाए, हर अथक प्रयास उठाएंगे हम।


जो क्रांति की ज्वाला हमारे क्रान्तिकारियों के सीने में धधकती थी, अब अपने हृदय में जगाएंगे हम,

धर्म और न्याय के पथ पर चलते हुए इस गणतंत्र भारत राष्ट्र का मान बरकरार सदा रखेंगे हम।


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