Ila Upadhyaya
Romance Fantasy Inspirational
दिल करता है हाथों से तेरा नाम लिखूँ,
हर हर्फ़ मोहब्बत से हर बार लिखूँ।
तुझको सोचूं आंखें बंद करके अपनी,
फिर तेरी आँखों को चूमकर बेशुमार लिखूँ।
ज़र्रा ज़र्रा
बेशुमार
अक्स
कश्मकश
आँखें
नाम
सुकून
आसमान
शाहीन
असंख्य सच्चे सहज भाव मर जाता है प्रेम बेमौत असंख्य सच्चे सहज भाव मर जाता है प्रेम बेमौत
धरती से आसमान तक, ये जहाँ बसा है जितना। धरती से आसमान तक, ये जहाँ बसा है जितना।
मेरी अहमियत को अपनी जिंदगी में बस थोड़ा खास बना देना। मेरी अहमियत को अपनी जिंदगी में बस थोड़ा खास बना देना।
तुम्हारा ना होकर भी सिर्फ तुम्हारा होकर रहना। अच्छा लगता है। तुम्हारा ना होकर भी सिर्फ तुम्हारा होकर रहना। अच्छा लगता है।
उस ख्वाब को हकीकत बनाना ही मोहब्बत का दूसरा नाम है। उस ख्वाब को हकीकत बनाना ही मोहब्बत का दूसरा नाम है।
कहना अब क्या ही तुझे यूं मेरी तरह तू खोया है क्यों? कहना अब क्या ही तुझे यूं मेरी तरह तू खोया है क्यों?
वन उपवन में महकते फूलों पर छाया वो बसंत हो तुम, वन उपवन में महकते फूलों पर छाया वो बसंत हो तुम,
क्या सुनाएं बेशुमार इश्क़ की दास्तान जो सुनकर अनसुनी हो गई वो मोहब्बत तेरी। क्या सुनाएं बेशुमार इश्क़ की दास्तान जो सुनकर अनसुनी हो गई वो मोहब्बत तेरी।
मैं तो तेरी ही ओर मरूं.... तुझको ही याद करूंं...। मैं तो तेरी ही ओर मरूं.... तुझको ही याद करूंं...।
प्रेम प्रतीक के रूप में जग भर नाम कमाये... प्रेम प्रतीक के रूप में जग भर नाम कमाये...
ये हम किस मोड़ पर खड़े हैं एक तुम हो और एक वो हैं....... ये हम किस मोड़ पर खड़े हैं एक तुम हो और एक वो हैं.......
फिर दोनों ने कभी नहीं चला हाथ में हाथ पकड़ मुट्ठी। फिर दोनों ने कभी नहीं चला हाथ में हाथ पकड़ मुट्ठी।
अपने अपने हिस्से का प्यार हम निभाएंगे। अपने अपने हिस्से का प्यार हम निभाएंगे।
जाने ये क्या हश्र करके मेरा अहम बन गए हो तुम। जाने ये क्या हश्र करके मेरा अहम बन गए हो तुम।
इस घर में बस, अब मुझे साथ तेरा चाहिएI इस घर में बस, अब मुझे साथ तेरा चाहिएI
तुझे लिखकर ही जी भरता। हे कविता में कविवर। तुझे लिखकर ही जी भरता। हे कविता में कविवर।
अब आगे ये कहानी जो भी मोड़ ले, अब वो आपसे नाराज नहीं हो पाएगी अब आगे ये कहानी जो भी मोड़ ले, अब वो आपसे नाराज नहीं हो पाएगी
आज मुझे तेरे ख्यालो की, बरसात ने भिगाया है आज मुझे तेरे ख्यालो की, बरसात ने भिगाया है
कहीं नासूर न बन जाये, ज़ख्म ये.... रिस्ते रिस्ते पैहम। कहीं नासूर न बन जाये, ज़ख्म ये.... रिस्ते रिस्ते पैहम।
हर इक आह में तू हर इक साँस में तू तेरा ख़्वाब हम रात भर देखते हैं हर इक आह में तू हर इक साँस में तू तेरा ख़्वाब हम रात भर देखते हैं