Ila Upadhyaya
Fantasy Inspirational
समेटले मुझे इन बादलों की तरह अपनी बाहों में,
कि मेरे वजूद को भी एक आसमान मिले।
कब से इंतज़ार में है तेरे, ये बेक़रार दिल,
आ भी जा रूबरू कि इसको कुछ तो क़रार मिले।
ज़र्रा ज़र्रा
बेशुमार
अक्स
कश्मकश
आँखें
नाम
सुकून
आसमान
शाहीन
मेरी आहों में छिपे दर्द को महसूस कर जाना फिर ना कहना, कोई तुझे बदनाम कर गया। मेरी आहों में छिपे दर्द को महसूस कर जाना फिर ना कहना, कोई तुझे बदनाम कर गया।
वो उड़कर देखते हैं मैं भी उन्हें देखा करूं वो उड़कर देखते हैं मैं भी उन्हें देखा करूं
तुम समेटकर दर्द, फिर उड़ जाना गंतव्य की ओर, तुम समेटकर दर्द, फिर उड़ जाना गंतव्य की ओर,
कोइ देखने लगा है रस्ता मेरा तेरी गलियों से अब निकलना पड़ेगा। कोइ देखने लगा है रस्ता मेरा तेरी गलियों से अब निकलना पड़ेगा।
अंतर्मन के बंधन खोलने बस सृष्टि में सम्मलित होने....... अंतर्मन के बंधन खोलने बस सृष्टि में सम्मलित होने.......
निरखि निरखि तेहि आत्मज्ञानी, वंहि बसि ध्यान लगावै निरखि निरखि तेहि आत्मज्ञानी, वंहि बसि ध्यान लगावै
बात छिपाऊँ कोई तो तिरछी नजरों में यूँ शक से देखे, बात छिपाऊँ कोई तो तिरछी नजरों में यूँ शक से देखे,
मेरी मौत पर ज्यादा ख़र्चा करने की कोई जरूरत नहीं मेरी मौत पर ज्यादा ख़र्चा करने की कोई जरूरत नहीं
अरे उसके तो दिल में ही थी हम मौत ढूंढते रहे उसके पांव में। अरे उसके तो दिल में ही थी हम मौत ढूंढते रहे उसके पांव में।
कैसा भी हो मौसम, रंग सलौने ये भरती रही। कैसा भी हो मौसम, रंग सलौने ये भरती रही।
अच्छा लगता है ये पंखा मुझको और ये रस्सी भी अच्छी लगती है। अच्छा लगता है ये पंखा मुझको और ये रस्सी भी अच्छी लगती है।
दिल में तुम्हीं गुलज़ार हो बस...तुम्हीं तो गुलज़ार हो। दिल में तुम्हीं गुलज़ार हो बस...तुम्हीं तो गुलज़ार हो।
चल पड़े सफर पे अंजान कुछ तो है दोनों के दरमियान। चल पड़े सफर पे अंजान कुछ तो है दोनों के दरमियान।
प्यार में एक मास भी पूरा नहीं कर पाए हम। प्यार में एक मास भी पूरा नहीं कर पाए हम।
होश में कब रहता वही अपने पीता वो ही शराब रहता है होश में कब रहता वही अपने पीता वो ही शराब रहता है
सब कुछ अपने पर है, जितना चाहे सोचो , जितना चाहे लिखो, कहीं कोई व्यवधान नहीं। सब कुछ अपने पर है, जितना चाहे सोचो , जितना चाहे लिखो, कहीं कोई व्यवधान...
रब मुहब्बत जिसकी कम नहीं हो कभी जीस्त में दिल का ऐसा जहां दें मुझे रब मुहब्बत जिसकी कम नहीं हो कभी जीस्त में दिल का ऐसा जहां दें मुझे
ऐसे ही किसी ख्याल ने माँ के मन में कहानी को उपजाया होगा। ऐसे ही किसी ख्याल ने माँ के मन में कहानी को उपजाया होगा।
जिंदगी तो उस खुले किताब के तरह है जिसके पन्ने खुद ही पलट जाते है जिंदगी तो उस खुले किताब के तरह है जिसके पन्ने खुद ही पलट जाते है
मेरी गजलों को तो अच्छा होना ही था jerry वो एक बोसा देती है, शेर की मिसालों में। मेरी गजलों को तो अच्छा होना ही था jerry वो एक बोसा देती है, शेर की मिसालों मे...