STORYMIRROR

Ila Upadhyaya

Abstract Romance Fantasy

3  

Ila Upadhyaya

Abstract Romance Fantasy

कश्मकश

कश्मकश

1 min
107

तुमसे जी भरकर लंबी

गुफ्तगू ना भी हो जाना,


एक घड़ी आवाज़ सुनकर

दिल को तसल्ली हो जाती है,


ये कैसी कशमकश में

डाल दिया तूने या रब,


रोज़ जागती हूँ तो,सूरज की पहली किरण

से तेरी तलब भी जाग जाती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract