STORYMIRROR

Alka Nigam

Romance

2  

Alka Nigam

Romance

बारिश

बारिश

1 min
338

आओ भीगें बारिश में

बंदिश तोड़ झिझक की हम


ओढ़ के बूंदों की चूनर 

बिजली की ताल पे नृत्य करें


रंग जाने दें मिट्टी से बनी

इस देह को फिर से मिट्टी में


मैले कर कपड़े अपने

अंतर्मन धुल जाने दें


आशाओं के झूले पे

कुछ पींगे प्यार की तुम मारो


धीमे धीमे आँच पे हम

कच्चे रिश्तों को पकाते हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance