ऐ शब-ए-फ़ुर्कत--
ऐ शब-ए-फ़ुर्कत--
ऐ शब-ए-फ़ुर्कत! अब इंतज़ार न कर।
ज़ुदा हुई हसरत, ये दिल बेज़ार न कर।।
दिल की सूनी गलियों से, रुख़सत हो।
ऐ रवायत! तू मौत का, दीदार न कर।।
थम गई साँसें, बोझिल हर लम्हा हुआ।
ऐ शब-ए-ज़ुल्मत! अब बेक़रार न कर।।
रुके हुए एहसास हैं, यूँ इज़हार न कर।
ऐ ग़म-ए-हयात! तन्हा इश्तहार न कर।।
'नीरस' चश्म-ए-पुर-आब से, ज़ुदा हो।
ऐ शब-ए-ख़ल्वत! मौत बाज़ार न कर।।
By Pratima
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