अगर तुम न होते तो
अगर तुम न होते तो
अगर तुम न होते तो ये शाम मस्तानी न होती,
सुंदर खिली हुई ये शाम मुझको वीरानी लगती,
तुम्हारा दिल से इंतजार करते करते ओ सनम,
ये सितारों की महफिल सूनसान बन गई होती।
अगर तुम न होते तो ये रात भी सुहानी न होती,
पूनम के ये चांद में तुम्हारी सूरत कभी न दिखती,
तुम को मेरे दिल में बसाने के लिये ओ सनम,
मेरे रोम रोम में इश्क की तरंगे लहराती न होती।
अगर तुम न होते तो ये कलम आंसु बहाती होती,
तुम्हारे अल्फाज़ के बिना गज़ल अधूरी रह जाती,
तुमको मेरी मल्लिका बनाने के लिये ओ सनम,
"मुरली" की जिंदगी में खुदा की कयामत न होती।

