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Priya Silak

Tragedy Action Inspirational

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Priya Silak

Tragedy Action Inspirational

“अधूरी सी मैं”

“अधूरी सी मैं”

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भीड़ में भी आजकल मैं अकेली लगती हूँ,
सबके बीच रहकर भी कुछ कमी सी लगती है।
लोग कहते हैं—“समय सब ठीक कर देगा…”
पर ये समय ही है जो हर पल उनकी याद दिलाता है।
पापा…
आपके बिना ये घर घर नहीं लगता,
हर चीज़ वैसी ही है…
बस आप नहीं हो… और कुछ भी वैसा नहीं रहा।
कभी सोचा नहीं था कि एक दिन
आपकी आवाज़ याद बन जाएगी,
और मैं हर रात उसी याद से बात करूँगी…
दिल में एक दर्द है, जो किसी को दिखता नहीं,
आँखों में आँसू हैं, जो हर बार गिरते नहीं।
मैं strong बनने की कोशिश करती हूँ,
पर अंदर से हर दिन थोड़ा और टूट जाती हूँ…
आप थे तो डर भी छोटा लगता था,
अब हर छोटी बात भी भारी लगती है।
कभी-कभी लगता है—
शायद आप कहीं पास ही हो,
बस मैं ही आपको देख नहीं पा रही…
पापा, मैंने अभी तक ये माना ही नहीं
कि आप सच में चले गए हो…
क्योंकि अगर मान लिया…
तो शायद मैं खुद को संभाल नहीं पाऊँगी।
ये stress, ये दर्द, ये खालीपन—
सब एक साथ मेरे अंदर बस गए हैं,
और मैं…
बस उन्हें छुपाकर जीने की कोशिश कर रही हूँ।


 शायद मैं मजबूत बन जाऊँ एक दिन…
पर आज भी मैं वही हूँ—
जो हर रात आपको याद करके चुपचाप रो लेती है…


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