STORYMIRROR

Priya Silak

Tragedy Action Inspirational

4  

Priya Silak

Tragedy Action Inspirational

ज़िंदगी की कशमकश

ज़िंदगी की कशमकश

1 min
1

ज़िंदगी की कशमकश में,
हर दिन खुद से लड़ना पड़ता है…
कभी सपनों को संभालना,
तो कभी हालातों से डरना पड़ता है…
ना रास्ते साफ दिखते हैं,
ना मंज़िल का कोई पता होता है…
फिर भी इस भीड़ में,
खुद को मजबूत दिखाना पड़ता है…
दिल कुछ और चाहता है,
दुनिया कुछ और सिखाती है…
यही कशमकश हर पल,
हमें अंदर ही अंदर तोड़ जाती है…
कभी हिम्मत हारने का मन करता है,
पर जिम्मेदारियाँ रोक लेती हैं…
और फिर हम मुस्कुरा कर,
अपनी थकान छुपा लेते हैं…
शायद यही ज़िंदगी है—
थोड़ा समझौता, थोड़ा संघर्ष…
और इसी कशमकश में ही,
हम खुद को पहचान लेते हैं… 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy