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Priya Silak

Abstract Tragedy Inspirational

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Priya Silak

Abstract Tragedy Inspirational

waqt

waqt

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वक़्त कहाँ किसी का होता है,
ये तो बस गुजर जाता है…
कभी हँसी के पलों में,
तो कभी दर्द बनकर ठहर जाता है…
जिसे हम अपना समझते हैं,
वो भी एक दिन बदल जाता है…
और जो साथ देने का वादा करते हैं,
वक़्त के साथ कहीं खो जाता है…
कल जो पास थे,
आज दूर नजर आते हैं…
शायद यही सच है,
कि रिश्ते भी वक़्त से ही बनते-बिगड़ते हैं…
हम सोचते हैं वक़्त हमारा है,
पर असल में हम ही उसके होते हैं…
वो चलता रहता है आगे,
और हम बस पीछे छूटते हैं…
वक़्त सिखा देता है सब कुछ,
बिना कुछ कहे, बिना आवाज़ के…
और जब समझ आता है,
तो बहुत कुछ छूट चुका होता है… 


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