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✨Nisha yadav✨ " शब्दांशी " ✍️

Tragedy

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✨Nisha yadav✨ " शब्दांशी " ✍️

Tragedy

अभिशाप

अभिशाप

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लड़की होना कभी कभी अभिशाप सा लगता है

जब कोई गंदी निगाहों से हमारी ओर देखता है


चुभन सी होती है मन में बार बार

खुद को कहीं छुपा देने को जी चाहता है 


कहते हैं कोमलता और ममता की देवी होती हैं लड़कियां

फिर भी गलत निगाहों से उन्हें कोई क्यों देखता है


मन पर जाने कितनी ही दरारें पड़ जाती हैं

जब कोई लड़की ऐसी अनुभूति पाती है


घुटन सी होती है खुद ही खुद में

सिमट कर बस आंसुओं में वो रह जाती है


लड़की होना कभी कभी अभिशाप सा लगता है

जब कोई गंदी निगाहों से हमारी ओर देखता है 


उसकी नज़रों की छुअन भी एक टीस बन जाती है

एक लड़की बिन कुछ कहे कितना कुछ सह जाती है


होती हैं उसे भी चिढ़ लोगों की सोच से

पर वो कुछ भी कहां कह पाती है


एक लड़की के मन पर जब कोई बात लग जाती है

कहती नहीं किसी से खुद ही सह जाती है


क्या अधिकार है किसी को

जो किसी लड़की को निहारे


छूकर उसे अपनी गंदी निगाहों से

उसे अन्दर ही अन्दर मारे


हां कभी कभी लड़की होना अभिशाप सा लगता है

जब कोई हमारी ओर गंदी निगाहों से देखता है।



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