STORYMIRROR

✨Nisha yadav✨ " शब्दांशी " ✍️

Abstract Fantasy

4  

✨Nisha yadav✨ " शब्दांशी " ✍️

Abstract Fantasy

दोस्ती

दोस्ती

1 min
248

हम दोस्ती सीखने गए 

 वो हमें दुश्मनी सिखा बैठे 

 

 हमारी खता इतनी सी थी 

 कि उन्हीं से दिल लगा बैठे

 

खुद ही हाथों में जाम लेके

वो बनते रहे शरीफ़


जब बात अपने पे आई

हमें ही कह दिया अजीब


खुद ही खोल के शराब की ठेकी 

खुद ही धरने पर बैठ गए


दोनों ही थी बाज़ी उनकी

वो ही बाज़ी जीत गए


हमारा था ही क्या यारों

हम तो वापस लौट गए


उनके दर पर ना जाकर भी

उनके शीशे तोड़ गए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract