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Jaswant Lal Khatik

Drama


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Jaswant Lal Khatik

Drama


आजकल के नेताजी

आजकल के नेताजी

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आजकल के नेताजी,

सफेद कुर्ता, सफेद टोपी,

सफेद गाडी ।

फिर भी

काला दिल होता इनका ।।


देश को खा रहे नेताजी

जैसे दीमक लकड़ी खाते ।

फिर भी इनकी हिम्मत देखो

देशभक्ति का तिलक लगाते ।।


झूठ बोलना काम इनका

सच का कभी नाम नही लेते ।

काम एक भी नही करवाते

आश्वासन ये हर रोज देते ।।


आठ जमात पढ़े नेताजी

चौदहवी पढे को समझाते है ।

बजट पास नही हुआ कहते ।

फिर

घर, कार और जमीन

कहाँ से लाते है ?


फाइले भेज दी आगे

पास पता नही कब होगी !

आस लगाये बैठी जनता

मांगे पूरी सबकी होगी !


जनता को तरसाते हुए

चार साल खूब कमाते ।

चुनावी साल में नेताजी

थोडा - सा धन बरसाते ।।


भोली - भाली जनता इनके

बहकावे में आ जाती है ।

मीठी बोली, हाथ जोड़ने पर

वोट इनको दे जाती है ।।


काश "जसवंत" नेता होता

देश से भ्रष्टाचार ज़रूर मिटाता ।

स्वच्छ राजनीति अपनाकर

गन्दी राजनीति जड़ से मिटाता !


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