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Rajeev Rawat

Romance

4  

Rajeev Rawat

Romance

आईना--दो शब्द

आईना--दो शब्द

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घूर कर न देखो 

आईना यूं बार बार, 

उम्र की लकीरों को लाख 

कोशिश से न छुपा पाओगी


एक बार मेरी 

नजरों से देखो कल जैसी थी, 

आज भी और कल भी वैसी ही नजर आओगी-


ये मोहब्बत का आईना

महबूब को अपना फरिश्ता बना देता है-

दिल के अहसासों में

तेरी खामियों से भी रिश्ता बना देता है-


जब थमने लगेगी

तुम्हारी रफ्तार - ए-जिंदगी 

नजरों के सामने मुझे ही तब भी पाओगी-

एक बार मेरी 

नजरों से देखो कल जैसी थी, 

आज भी और कल भी वैसी ही नजर आओगी-


ये दिल का आईना है

दाग-ए-मेहताब को भी छुपा लेता है-

जानता है कि हकीकत उसकी

फिर भी इंतजार - ए-इश्क में जज्बात बहा देता है-


मोहब्बत के इस आईने में

रूप की नहीं दिल की परिछायी नजर आयेगी-

जब तुम प्यार से देखोगी

बस मोहब्बत ही नजर आयेगी-


जब भी करोगी 

दीदार - ए-इश्क का

अहसासों के अक्स में ही डूब जाओगी-

एक बार मेरी 

नजरों से देखो कल जैसी थी, 

आज भी और कल भी वैसी ही नजर आओगी-


घूर कर न देखो 

आईना यूं बार बार, 

उम्र की लकीरों को लाख 

कोशिश से न छुपा पाओगी


एक बार मेरी 

नजरों से देखो कल जैसी थी, 

आज भी और कल वैसी ही नजर आओगी।

           



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