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जब पंखो को फैलाने की सीख ली थी कला- आहिस्ता आहिस्ता पार कर गया बंधनों का किला- अब मैं था, मेरी ख्वाह... जब पंखो को फैलाने की सीख ली थी कला- आहिस्ता आहिस्ता पार कर गया बंधनों का किला- अ...
मत रोको तुम मन के भाव,अब बन सरिता बह जाने दोक कलम उठाने दो लेखक को, अनकहा रहा,कह जाने दो कितना दर्द ... मत रोको तुम मन के भाव,अब बन सरिता बह जाने दोक कलम उठाने दो लेखक को, अनकहा रहा,कह...
चलो याद करें उनको हम , जो लौट कर घर न आये। चलो याद करें उनको हम , जो लौट कर घर न आये।
पतझड़ का अंत हो और कहीं प्यार का पुष्प खिले- पतझड़ का अंत हो और कहीं प्यार का पुष्प खिले-
उठती मन की पीड़ में- मिलने की अहसास में होता हूं अधीर मैं। उठती मन की पीड़ में- मिलने की अहसास में होता हूं अधीर मैं।
कितनी बार भींगे हैं तन्हा तेरी यादों की बारिश तले- कितनी बार भींगे हैं तन्हा तेरी यादों की बारिश तले-
हर तरफ स्वार्थ के हस्ताक्षरों ने लिख दिया था भाग्य को- हर तरफ स्वार्थ के हस्ताक्षरों ने लिख दिया था भाग्य को-
हम भी तो तेरे बाग के पंछी, क्या परवाज करायेगा हम भी तो तेरे बाग के पंछी, क्या परवाज करायेगा
ऐसो रंग दओ मोय की गुजरिया ने हम तो लुट गये बीच बजरिया में। ऐसो रंग दओ मोय की गुजरिया ने हम तो लुट गये बीच बजरिया में।
जब तेरी गोदी में सिर रख कर, चांद भरी उन रातों में जब तेरी गोदी में सिर रख कर, चांद भरी उन रातों में