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प्रदीप कुमार दाश "दीपक"

Drama

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प्रदीप कुमार दाश "दीपक"

Drama

आई कोंपलें

आई कोंपलें

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यूँ यकायक

जागी संवेदनाएँ

टहनी के भीतर

फिर क्यों हुई

अजब सी बेचैनी

आई नयी कोंपल।


कोंपलें आई

मिला है अवसर

ठूँठ को हँसने का

उपेक्षित था

मिल गया बहाना

फिर उसे जीने का।


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