STORYMIRROR

प्रदीप कुमार दाश "दीपक"

Others

3  

प्रदीप कुमार दाश "दीपक"

Others

माटी के घर

माटी के घर

1 min
736

पत्ते झरते

डाली छोड़ दी साथ

किसे कोसते।


भोर की दूब

पहन ओस मोती

फबती ख़ूब।


सुख सहज

दुःख के सफर का

चुकाता कर्ज।


भीड़ दिखावा

साथ यहाँ छलावा

चल अकेला।


माटी के घर

बेहद मजबूत 

रिश्ते पकड़।



ଏହି ବିଷୟବସ୍ତୁକୁ ମୂଲ୍ୟାଙ୍କନ କରନ୍ତୁ
ଲଗ୍ ଇନ୍