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माटी के घर
माटी के घर
माटी के घर
माटी के घर
पत्ते झरते
डाली छोड़ दी साथ
किसे कोसते।
भोर की दूब
पहन ओस मोती
फबती ख़ूब।
सुख सहज
दुःख के सफर का
चुकाता कर्ज।
भीड़ दिखावा
साथ यहाँ छलावा
चल अकेला।
माटी के घर
बेहद मजबूत
रिश्ते पकड़।
ଏହି ବିଷୟବସ୍ତୁକୁ ମୂଲ୍ୟାଙ୍କନ କରନ୍ତୁ
ଲଗ୍ ଇନ୍
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