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Abhinav Kumar

Drama Tragedy

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Abhinav Kumar

Drama Tragedy

15 अगस्त की विदाई पर

15 अगस्त की विदाई पर

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हर तरफ,

देशभक्ति का ज़ज़्बात है

यहां बस,

आज आज़ादी की बात है


कल फिर से,

"मैं" साफ और

बाकी पर इल्ज़ामात है,


मर चुका है आदमी और उसका ईमान ,

अब बस,

धर्म है, मजहब है,

ज़ुल्म है, और "जात" है!


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