सुकून
सुकून
सुकून ढूंढता हो कहाँ ?
उस फूल में या छांव में ?
या फिर नदी के बहाव में ?
बारिश की बूंदों में ?
या फिर चलती हवाओं में?
क्या तराशा है कभी सुकून को
तुमने खुद के मचलते ठहराव में ?
बस इसी जंजीर को टोड़ना है
खुद के सुकून को खुद में ढूंढना है.....

