STORYMIRROR

Ajita Singh

Fantasy

4  

Ajita Singh

Fantasy

कविता

कविता

1 min
406

दिल तुम्हें देखकर

अक्सर ये सोचता है


तुम मेरा भ्रम हो या 

कोई कल्पना 


मेरी अलसायी हुई सुबह या 

जागती रातों का सपना 


तुम क्यों मेरी कविता का केन्द्र बिंदु हो 

सार हो... शीर्षक हो... 


तुम क्यों हो ?

कौन हो ?


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Ajita Singh

Similar hindi poem from Fantasy