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Ajita Singh

Fantasy

4  

Ajita Singh

Fantasy

कविता

कविता

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दिल तुम्हें देखकर

अक्सर ये सोचता है


तुम मेरा भ्रम हो या 

कोई कल्पना 


मेरी अलसायी हुई सुबह या 

जागती रातों का सपना 


तुम क्यों मेरी कविता का केन्द्र बिंदु हो 

सार हो... शीर्षक हो... 


तुम क्यों हो ?

कौन हो ?


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