Ajita Singh
Fantasy
दिल तुम्हें देखकर
अक्सर ये सोचता है
तुम मेरा भ्रम हो या
कोई कल्पना
मेरी अलसायी हुई सुबह या
जागती रातों का सपना
तुम क्यों मेरी कविता का केन्द्र बिंदु हो
सार हो... शीर्षक हो...
तुम क्यों हो ?
कौन हो ?
वो शाम.....
कांटे
मौन भाषा
सुकून
जैसे
सफ़र
कविता
प्यार
मौन
तुम
नज़रें चुरा के नज़रें मिलाना सीखा कहाँ से तुमने पागल बनाना... नज़रें चुरा के नज़रें मिलाना सीखा कहाँ से तुमने पागल बनाना...
पंचर होता या टीप भी फट जातीं, मगर साईकिल वफादार बताते थे। पंचर होता या टीप भी फट जातीं, मगर साईकिल वफादार बताते थे।
आप पापा हो मुझे प्यार करते रेहेना कभी भी मर्दांगी मत दिखाना आप पापा हो पापा ही रहना आप पापा हो मुझे प्यार करते रेहेना कभी भी मर्दांगी मत दिखाना आप पापा हो...
है चाँद छूने की तमन्ना तो ख़्वाब देखिए... है चाँद छूने की तमन्ना तो ख़्वाब देखिए...
रोज बनाता हूं तस्वीर तेरी शोख अदाओं की मेरी धड़कन हर रोज तेरी महफ़िलें सजाती है। रोज बनाता हूं तस्वीर तेरी शोख अदाओं की मेरी धड़कन हर रोज तेरी महफ़िलें सजात...
आख़िर...वो सफ़र, चला ही गया ! ज़रूर आऊँगा मैं, कहकर चला ही गया ! आख़िर...वो सफ़र, चला ही गया ! ज़रूर आऊँगा मैं, कहकर चला ही गया !
बिछड़ना कुदरत का नियम है, बस! यादें उसकी बात कहें।। बिछड़ना कुदरत का नियम है, बस! यादें उसकी बात कहें।।
सावन की रिमझिम फुहार, तन पर जब से पड़ी हैं.. सावन की रिमझिम फुहार, तन पर जब से पड़ी हैं..
अपनी चाहतों का खजाना हमने खुलेआम भेजा है। अपनी चाहतों का खजाना हमने खुलेआम भेजा है।
बरसों गुजर गये कशमकश के पलना में कि तुम्हारा जवाब हां में था या ना में। बरसों गुजर गये कशमकश के पलना में कि तुम्हारा जवाब हां में था या ना में।
इश्क भी जो किया तो किया क्या किया जो किया जिंदगी फिर कहीं रह गई इश्क भी जो किया तो किया क्या किया जो किया जिंदगी फिर कहीं रह गई
सच से मुंह मोड़ रखा है झूठ से दिल जोड़ रखा है। सच से मुंह मोड़ रखा है झूठ से दिल जोड़ रखा है।
प्रियतम जीते जहाँ प्रियतमा हार गई वहीं। प्रियतम जीते जहाँ प्रियतमा हार गई वहीं।
चुनाव की तरंगें जीवन की राह, कुत्ते की टेडी पूँछ की मिसाल। चुनाव की तरंगें जीवन की राह, कुत्ते की टेडी पूँछ की मिसाल।
शब्दों के एहसांसो में है सुगंध तेरी बातों का। शब्दों के एहसांसो में है सुगंध तेरी बातों का।
समय के साथ हर घाउ भर जाता है कृपया अपने राय अपने पास रखिए। समय के साथ हर घाउ भर जाता है कृपया अपने राय अपने पास रखिए।
प्रह्लाद की कथा हमें देती सदैव एक सीख प्रह्लाद की कथा हमें देती सदैव एक सीख
सोच के उसकी बातों को ,जब-जब मन प्रफुल्लित हो सोच के उसकी बातों को ,जब-जब मन प्रफुल्लित हो
मैं करुँगी थाणी चोखी मनुहार खुद भी खाऊ थाने भी खडाऊ पेट भरार... मैं करुँगी थाणी चोखी मनुहार खुद भी खाऊ थाने भी खडाऊ पेट भरार...
डूबकर अपनी और अपनी दिल की सुनकर एक हो हौसला सा मिलता है। डूबकर अपनी और अपनी दिल की सुनकर एक हो हौसला सा मिलता है।