Ajita Singh
Fantasy
दिल तुम्हें देखकर
अक्सर ये सोचता है
तुम मेरा भ्रम हो या
कोई कल्पना
मेरी अलसायी हुई सुबह या
जागती रातों का सपना
तुम क्यों मेरी कविता का केन्द्र बिंदु हो
सार हो... शीर्षक हो...
तुम क्यों हो ?
कौन हो ?
वो शाम.....
कांटे
मौन भाषा
सुकून
जैसे
सफ़र
कविता
प्यार
मौन
तुम
डर गई सोच कि वो खिल कर फूल न बन जाए डर गई सोच कि वो खिल कर फूल न बन जाए
गांव जलता रहा वो तमाशाई थे उनके शहरों में भी हादसे हो गए गांव जलता रहा वो तमाशाई थे उनके शहरों में भी हादसे हो गए
पहले दोस्त के बिना मन नहीं लगता था पहले दोस्त के बिना मन नहीं लगता था
मिलकर तुम झूम जाना, सबको अपने संग मिलाना, मिलकर तुम झूम जाना, सबको अपने संग मिलाना,
ड़दंग होली का है ,गली - गली हर मोहल्ले I ड़दंग होली का है ,गली - गली हर मोहल्ले I
जाने कब वो हसीं दिन आएगा, जब ख्वाब हकीकत में बदलेगा। जाने कब वो हसीं दिन आएगा, जब ख्वाब हकीकत में बदलेगा।
बसंत के शुभ आगमन से ही, प्रकृति छटा बिखेर मुस्कुराती है ! बसंत के शुभ आगमन से ही, प्रकृति छटा बिखेर मुस्कुराती है !
मनमोही, मनमोहन नाम तेरे लगें ऐसे, जैसे सारे मेरे...... मनमोही, मनमोहन नाम तेरे लगें ऐसे, जैसे सारे मेरे......
धन दौलत तो आनी जानी चीज़ है, रिश्तों में दिल का बंटवारा मत करना ! धन दौलत तो आनी जानी चीज़ है, रिश्तों में दिल का बंटवारा मत करना !
तू प्यार है किसी और का और की हो जायेगी। तू प्यार है किसी और का और की हो जायेगी।
कोयल का गीत गूंजने दो मौन का संगीत ! कोयल का गीत गूंजने दो मौन का संगीत !
इश्क़ में तेरे मुझे हर हद से गुज़र जाने दे..! इश्क़ में तेरे मुझे हर हद से गुज़र जाने दे..!
मैं उस लायक नहीं था की वह रुक जाती । मैं उस लायक नहीं था की वह रुक जाती ।
खुद को तेरी समझने, की कोशिशों में. खुद को तेरी समझने, की कोशिशों में.
सुबह भी तुम्ही से शुरू होता है, शाम भी तुम्ही पर न्योछावर होता हैं सुबह भी तुम्ही से शुरू होता है, शाम भी तुम्ही पर न्योछावर होता हैं
आज छूटा हुआ हाथों में हाथ आ गया आज छूटा हुआ हाथों में हाथ आ गया
बागों की हरियाली, क्रीड़ा करता यौवन, बागों की हरियाली, क्रीड़ा करता यौवन,
जिसमें हम होंगे कहीं साथ हम यूं मिलेंगे आज। जिसमें हम होंगे कहीं साथ हम यूं मिलेंगे आज।
हर दिन में तुमसे प्यार हैं, तुम्हारा हीं इंतज़ार हैं....... हर दिन में तुमसे प्यार हैं, तुम्हारा हीं इंतज़ार हैं.......
फूल बनकर मोहन को रिझाऊं, श्याम के मधुबन में जाऊं। फूल बनकर मोहन को रिझाऊं, श्याम के मधुबन में जाऊं।