Ajita Singh
Fantasy
दिल तुम्हें देखकर
अक्सर ये सोचता है
तुम मेरा भ्रम हो या
कोई कल्पना
मेरी अलसायी हुई सुबह या
जागती रातों का सपना
तुम क्यों मेरी कविता का केन्द्र बिंदु हो
सार हो... शीर्षक हो...
तुम क्यों हो ?
कौन हो ?
वो शाम.....
कांटे
मौन भाषा
सुकून
जैसे
सफ़र
कविता
प्यार
मौन
तुम
साँस बनके साँसों में तू इस कदर समाया है दिल में प्यार को तूने ही इस कदर बसाया है। साँस बनके साँसों में तू इस कदर समाया है दिल में प्यार को तूने ही इस कदर बसाया...
और जो पहुंचा देता है मन की जुबान को किसी और के सामने वह है कविता का स्वरूप। और जो पहुंचा देता है मन की जुबान को किसी और के सामने वह है कविता का स्वरूप।
मेरा"" साहिल ""मेरा नाम हो तुम हां सिर्फ तुम सिर्फ तुम और सिर्फ तुम। मेरा"" साहिल ""मेरा नाम हो तुम हां सिर्फ तुम सिर्फ तुम और सिर्फ तुम।
शब्दों ने आकर , तब मुझे थामा था. शब्दों ने आकर , तब मुझे थामा था.
तमन्ना बस यही थी हमारी कि तेरे आंचल में ज़िंदगी गुज़रे सारी। तमन्ना बस यही थी हमारी कि तेरे आंचल में ज़िंदगी गुज़रे सारी।
जिसे मैंने ना खोला ना ही पहचाना, मुझपर यूँ ही हँसता रहा सारा ज़माना। जिसे मैंने ना खोला ना ही पहचाना, मुझपर यूँ ही हँसता रहा सारा ज़माना।
सही लेकिन है अमूल्य वह पुत्र मज़दूर कहलाता हैं। सही लेकिन है अमूल्य वह पुत्र मज़दूर कहलाता हैं।
ये जिंदगी कच्ची लिखी थी खुदा ने, में पक्की लिखवाकर आऊंगा, तब मिलेंगे। ये जिंदगी कच्ची लिखी थी खुदा ने, में पक्की लिखवाकर आऊंगा, तब मिलेंगे।
अविराम गति मन से यह होड़ करे कैसे कोई काम करे। अविराम गति मन से यह होड़ करे कैसे कोई काम करे।
जीवन के हर क्षण में तेरे प्रेम स्नेह का एहसास रहे। जीवन के हर क्षण में तेरे प्रेम स्नेह का एहसास रहे।
लेकिन मैं तो व्यस्त था दूसरी दुनिया में। लेकिन मैं तो व्यस्त था दूसरी दुनिया में।
प्रकृति की साँसों पर सजती है सदियों पुरानी वही मुस्कुराहट फिर से। प्रकृति की साँसों पर सजती है सदियों पुरानी वही मुस्कुराहट फिर से।
कुछ भूली हुई तान को छेड़ो यारों उन अधूरे गीतों को पूरा कराओ यारों ! कुछ भूली हुई तान को छेड़ो यारों उन अधूरे गीतों को पूरा कराओ यारों !
और कैसे बयां करूं अपनी हसरतें, बस जान लो कि तुम मेरी जान हो। और कैसे बयां करूं अपनी हसरतें, बस जान लो कि तुम मेरी जान हो।
वो करती हैं मुझसे भी लेकिन, करती कभी इकरार नहीं। वो करती हैं मुझसे भी लेकिन, करती कभी इकरार नहीं।
मेरे प्यार की गहराई 1 दिन आपको जमाना बोलेगा। मेरे प्यार की गहराई 1 दिन आपको जमाना बोलेगा।
अंत है नहीं कोई आरंभ, अंत आरंब है आरंभ अंत है यह उलझन सुलझी न कभी। अंत है नहीं कोई आरंभ, अंत आरंब है आरंभ अंत है यह उलझन सुलझी न कभी।
और फिर मेरे साथ चैन की नींद सो जाना। तो सच कहा ना ? हूँ ना, मैं तुम्हारा साथी, तुम्हार और फिर मेरे साथ चैन की नींद सो जाना। तो सच कहा ना ? हूँ ना, मैं तुम्हारा साथी...
बिन धड़कन भी तेरे संग एक जां है कैसे कह दूं तू कितनी ख़ास है। बिन धड़कन भी तेरे संग एक जां है कैसे कह दूं तू कितनी ख़ास है।
हिचकियों से थी अवरुद्ध श्वास उसकी हिचकियों से थी अवरुद्ध श्वास उसकी