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Bikramjit Sen

Abstract Drama Romance

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Bikramjit Sen

Abstract Drama Romance

कवि कभी

कवि कभी

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कभी किसी ने कहा था,

तुम मोहब्बत में एक कदम लेना


मैं तुम्हारी चाहत में दस कदम लूंगी कभी

कवि, तुम इधर चलना

कवि, तुम उधर चलना


जाने कहां, कवि हमें किधर चलना

पर फिर जिस ओर भी चलना

संग मेरे चलना, हमेशा

हर दम, हर पल, हर दफ़ा।


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