STORYMIRROR

Abhinav Kumar

Romance

3  

Abhinav Kumar

Romance

"वो" भी मौसम के जैसे हैं

"वो" भी मौसम के जैसे हैं

1 min
278

सजाकर रात ख्वाबों की

फिर तन्हा दिन निकलता है

उठाकर चांदनी सर पर

लबों से गम फिसलता है


मिटा कर अपनी हस्ती को

दीवाने हाथ मलते हैं

उमर भर याद थी जिनकी

कहां वो साथ चलते हैं।


"वो" भी मौसम के जैसे हैं

जो बस रंगत बदलता है

ना हम मायूस होते हैं

ना उनका दिल पिघलता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance