Abhinav Kumar
Drama
लोगों की रट है
वाह ! क्या बजट है
इलेक्शन के पहले
ये पासा पलट है।😛
जनता ही देती
सदन का टिकट है
जनता की लेकिन
समस्या विकट है।
धड़कन है बढ़ती
हर पल-मिनट है
इलेक्शन निकट है जी
इलेक्शन निकट है !
अनकही
"वो" भी मौसम ...
तलाश
चुनाव, बजट और...
वो कौन थी
कट रही है ज़िन...
दर्द की दास्त...
15 अगस्त की व...
एक सिपाही की ...
उसकी याद में
देश के लिए लड़ना सिखाती है वह भूमि मां कहलाती है। देश के लिए लड़ना सिखाती है वह भूमि मां कहलाती है।
मेरे लिबास की सादगी देखकर लोग बनाकर रखते हैं मुझसे दूरियाँ मेरे लिबास की सादगी देखकर लोग बनाकर रखते हैं मुझसे दूरियाँ
बंजर प्यासी धरती हरियाली को तरसती हैl ठूँठ की चिड़िया जल बिन मछली सी तड़पती है l बंजर प्यासी धरती हरियाली को तरसती हैl ठूँठ की चिड़िया जल बिन मछली सी तड़पती है ...
अब न कंधे पर मित्र हाथ तेरा बिछड़ गया है, प्रिय दोस्त मेरा अब न कंधे पर मित्र हाथ तेरा बिछड़ गया है, प्रिय दोस्त मेरा
सब्जी मंडी, छोटी दुकानों पर लगी है, रोक वाह रे, सरकार तुझे लगा दोगली नीति रोग सब्जी मंडी, छोटी दुकानों पर लगी है, रोक वाह रे, सरकार तुझे लगा दोगली नीति रोग
मेरी गुणवत्ता की पहचान करने के तरीके तलाशते हो, मेरी गुणवत्ता की पहचान करने के तरीके तलाशते हो,
अच्छी कविता होने पर मुझको देती शाबाशी थी अच्छी कविता होने पर मुझको देती शाबाशी थी
पहले मकान कच्चे थे, पर मन थे, मजबूत आज हवा ऐसी चल रही है, घर रहे है, टूट पहले मकान कच्चे थे, पर मन थे, मजबूत आज हवा ऐसी चल रही है, घर रहे है, टूट
बस एक उसकी याद, ये इतना मशगूल हो गया है बस एक उसकी याद, ये इतना मशगूल हो गया है
सब इस पर जान लुटाएंगे, हर घर सब फहरायेंगे।। सब इस पर जान लुटाएंगे, हर घर सब फहरायेंगे।।
आंखों में चमक और दिल में जोश तो, होगी मंजिल भी नजदीक आंखों में चमक और दिल में जोश तो, होगी मंजिल भी नजदीक
थेथर की तरह पसरी रहती हूँ अक्सर। थेथर की तरह पसरी रहती हूँ अक्सर।
मेरी गुड़िया कानी हो गई मैं कितना चिल्लाई थी । भैया मेरी गुड़िया की शादी में बाराती बन मेरी गुड़िया कानी हो गई मैं कितना चिल्लाई थी । भैया मेरी गुड़िया की शादी में बा...
गर यही हाल रहे, तो है, मुमकिन कलाई सुनी रह जायेगी, एक दिन गर यही हाल रहे, तो है, मुमकिन कलाई सुनी रह जायेगी, एक दिन
कोई मरता कर्ज में दबकर कहीं करोड़ों के कर्ज माफ होते गए।। कोई मरता कर्ज में दबकर कहीं करोड़ों के कर्ज माफ होते गए।।
पारिजात सी एक लड़की पर सात सुरों का सरगम लिखते, पारिजात सी एक लड़की पर सात सुरों का सरगम लिखते,
क्रोध अवस्था भ्रम अवस्था हो, बुद्धि भ्रष्ट, अभिमानी पतन की क्रिया शुरू है, क्रोध अवस्था भ्रम अवस्था हो, बुद्धि भ्रष्ट, अभिमानी पतन की क्रिया शुरू है,
किसी को फुर्सत नहीं पास बैठें दो बातें करें l चुपचाप तनहाइयों को वो दोस्त बना लेती है किसी को फुर्सत नहीं पास बैठें दो बातें करें l चुपचाप तनहाइयों को वो दोस्त बना...
कुशल अभिनेता ही होते हैं ये नेता, इन्हें समझ ही सके न सारा जमाना। कुशल अभिनेता ही होते हैं ये नेता, इन्हें समझ ही सके न सारा जमाना।
कद्र करो, यहां तुम बस खुद की भद्र रहो, जैसे होती कोई कौमुदी कद्र करो, यहां तुम बस खुद की भद्र रहो, जैसे होती कोई कौमुदी