Abhinav Kumar
Romance
कोशिश करता रहा
पर वो दूर होती गई
उससे वस्ल की उम्मीद
ख़्वाबों में खोती गई
फुरकत की वज़ह मुझ को
मालूम नहीं है
तनहा सा दिल ये मेरा
मज़लूम यहीं है
बेचैन हूं मैं हरदम
जान सांसत में फंसी है
हैरान सब ये सुनकर
उसका नाम "खुशी" है
अनकही
"वो" भी मौसम ...
तलाश
चुनाव, बजट और...
वो कौन थी
कट रही है ज़िन...
दर्द की दास्त...
15 अगस्त की व...
एक सिपाही की ...
उसकी याद में
अक्सर तन्हा रातों में ये जगने लगा है आजकल। अक्सर तन्हा रातों में ये जगने लगा है आजकल।
लेकिन तारीफ़ है तेरी इस बार भी कि तू मुझे ज़िद्दी बना कर गया है। लेकिन तारीफ़ है तेरी इस बार भी कि तू मुझे ज़िद्दी बना कर गया है।
समाज के ठेकेदारों ने तो जुल्मी होने का काम किया अहम की शान्ति को रीति रिवाजों का नाम. समाज के ठेकेदारों ने तो जुल्मी होने का काम किया अहम की शान्ति को रीति र...
पुष्प खिले हैं अमित यहां , खिला खिला हुआ बाग बाग में फिर वसंत आया है ,लेके ऋत अनुराग। पुष्प खिले हैं अमित यहां , खिला खिला हुआ बाग बाग में फिर वसंत आया है ,लेके ऋत अ...
टूट चुकी हूं अंदर-अंदर, मन से तुम कब जोड़ोगे। टूट चुकी हूं अंदर-अंदर, मन से तुम कब जोड़ोगे।
तेरी आरजू सा क्यों है न जाने आज भी तेरी जुस्तज़ु सा क्यों है। तेरी आरजू सा क्यों है न जाने आज भी तेरी जुस्तज़ु सा क्यों है।
मरते दम तक मेरी प्रियतम, साथ तुम्हारा ना छोडूंगा। मरते दम तक मेरी प्रियतम, साथ तुम्हारा ना छोडूंगा।
काश बाबा इस धरा पर फिर से तुम आते काश बाबा इस धरा पर फिर से तुम आते
छुपा लूंगा तुम्हें पलकों में जाने ना दूंगा इस बार। छुपा लूंगा तुम्हें पलकों में जाने ना दूंगा इस बार।
वह करें तलाश उसे फिर भी वह करे प्रेम उससे फिर भी। वह करें तलाश उसे फिर भी वह करे प्रेम उससे फिर भी।
तकदीर का मारा कुछ हिस्सा तेरा था कुछ हिस्सा मेरा था ! तकदीर का मारा कुछ हिस्सा तेरा था कुछ हिस्सा मेरा था !
तेरे प्यार की बरखा को तब मेरा प्यासा मन तरसा था तेरे प्यार की बरखा को तब मेरा प्यासा मन तरसा था
नयीं यादों को जोड़ने में गुम हो जाना वो यादें। नयीं यादों को जोड़ने में गुम हो जाना वो यादें।
अगर इश्क़ कर लिया तो रोज पल-पल मरोगे सच है ना। अगर इश्क़ कर लिया तो रोज पल-पल मरोगे सच है ना।
अब बहुत खलता है वो दिन जो बीत गया की तुझको देखे हुए कितना दिन हो गया। अब बहुत खलता है वो दिन जो बीत गया की तुझको देखे हुए कितना दिन हो गया।
अपने मस्तक को आराम देती हो और किसी के स्वप्न में लीन हो जाती हो। अपने मस्तक को आराम देती हो और किसी के स्वप्न में लीन हो जाती हो।
हसरतों की सेज सजाए हुए पलकों में सारी रात काटी है। हसरतों की सेज सजाए हुए पलकों में सारी रात काटी है।
ओ क्या कुछ कहना है आपको, कुछ कहना है आपको। ओ क्या कुछ कहना है आपको, कुछ कहना है आपको।
हाय अब बिरहन अगन दिनरात डसती है मुझे तुम न आओगे कभी ये बात चुभती है मुझे। हाय अब बिरहन अगन दिनरात डसती है मुझे तुम न आओगे कभी ये बात चुभती है मुझे।
आज फिर से हम से मैं और तुम बन गए। आज फिर से हम से मैं और तुम बन गए।