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Man Singh Negi

Abstract Classics Inspirational

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Man Singh Negi

Abstract Classics Inspirational

बर्बाद

बर्बाद

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जिंदगी में कुछ आपातकालीन दौर से गुजर रहे हो तो यह समझ लेना उसे ही बर्बादी कहते हैं।*

परंतु सोचने वाली बात है बर्बादी आने का कारण क्या है।

क्यों ऐसी आपातकालीन स्थिति बन गई।

एक अच्छे खासे नामचीन रोजी रोटी कमाने वाले की।

क्यों वह इस कदर बर्बाद हो गए जबकि उनका रुतबा ही अलग था बर्बादी से पहले।

आज आपको ले चलता हूं वहां जहां टीम के सदस्य अपने आप को बर्बाद करने में समय लगाते हैं। 

वह भी जानबूझकर ऐसा करते हैं। 

उन्हें मालूम है वह अपने हिसाब से बेहतर कर रहे हैं। 

परंतु वह जो कर रहे हैं वह नहीं जानते वे क्या कर रहे हैं।

इस तथ्य को समझने के लिए आपको टीम के सदस्यों से रूबरू करवाता हूं।

जो कहते हैं उन्हें सब काम आता है।

जो यह कहने में संकोच नहीं करते हमें मीटिंग की कोई आवश्यकता नहीं है।

देखिए लोग चाहते हैं हमे काम मिले। 

हम काम करें घर में चार पैसे आए। जिसके कारण हम फूले फले।

उसके बावजूद कुछ समय तक वह जो सोच रहे हैं वैसा करते भी हैं।

परंतु जैसे-जैसे समय गुजरता जाता है।

वैसे वैसे व्यक्ति विशेष अहम में डूब जाता है। 

उसके बिना अब कंपनी का काम नहीं चल पाएगा। 

इसलिए वह धीरे-धीरे काम ना करना शुरू कर देता है।

जहां हम कह सकते हैं बने रहो पगला काम करेगा अगला। 

इसीलिए वह धीरे-धीरे काम न करने के तरीके खोज लेता है। 

जहा हम कह सकते है। बने रहो लुल तनख्वाह लो फुल। 

इसीलिए वह धीरे-धीरे काम के बहाने ही नहीं खोजता। 

अपितु वह काम करना ही बंद कर देता है। 

वह भी यह सोच कर काम से डरना नहीं और काम को करना नहीं।

अब वह इस आदत के चलते एक सफल कामचोर बन चुका होता है। 

कामचोर महज कामचोर नहीं होता। 

वह वास्तव में अपने आप को बर्बाद करने का सबसे अच्छा तरीका स्वयं से खोज लेता हैं। 

क्योंकि यह वही लोग हैं जो अपने साहब से काम की चर्चा तो करते हैं। 

परंतु जो काम करता है उसको भी उंगली करते हैं।

वह धीरे-धीरे काम ना करने की आदत की वजह से अपने उज्ज्वल भविष्य को चुपचाप खामोशी से धीरे-धीरे बर्बाद करने के लिए काम चोरी रूपी जहर अपने व्यवहार में स्वयं से घोल लेते हैं।

वह टीम का सदस्य यहां तक भूल जाता है। 

हर दिन काम हर व्यक्ति की नई चुनौतियों के माध्यम से परीक्षा लेता है।

वह टीम का सदस्य यहां तक भूल जाता है। 

हर दिन काम हमारे लिए नई नई परेशानियां लेकर आता है।

परंतु कामचोर कभी भी इस परीक्षा में नहीं बैठ पाते।

क्योंकि काम चोरी उन्हें प्रतिदिन हालात से ना लड़ने के लिए रोकती है।

काम चोरी उन्हें काम नहीं करने देती।

जिसके कारण वह यह समझ पाने में असमर्थ होते हैं।

हर दिन व्यक्ति नई परीक्षाओं को पास करके अनुभव प्राप्त करता है। 

काम चोरी वह मीठा जहर है जिसने इसे पी लिया।

वह आज नहीं तो कल बर्बाद होकर वही रोना रोएगा। 

जो आज के कुछ नागरिक रो रहे है। 

हमारे पास रोजगार नहीं है। हम बेरोजगार हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने रोजगार के अवसर नहीं दिए।

वह कभी नहीं बताएगा वह बेरोजगारी की लाइन में खड़ा होकर मोदी जी को दोष क्यों दे रहा है।

वह कभी नहीं बताएगा कि वह छप्पन भोग की थाली सिर्फ इसलिए ठुकरा कर आया है। 

क्योंकि वह कार्यालय में काम चोरी करता था।

उसे कुछ भी काम कहो वह उसमें टालमटोल करता था।

आज वह अपनी बर्बादी का स्वयं से जिम्मेदार है।

क्योंकि आज वह दो वक्त की बिना घी की रोजी-रोटी को तरस रहा है।

इसलिए कहता हूं चाहे आला अधिकारी हो या छोटे पद पर कार्यरत कर्मचारी कर्म प्रधान जीवन में काम करना ही होगा। 

इसलिए कर्म प्रधान जीवन में कर्म करो फल की चिंता मत करो। 

भगवान राधे कृष्ण ने जीवन को सफल बनाने का यही मूल मंत्र सबको दिया है।

अपने आपको को बर्बादी की काली चादर में गुम मत होने दो। 

मेहनत करो मेहनत करो कल यह कहने को ना रह जाय। 

जी जान से काम करता तो किस्मत कुछ और होती। 

बड़े बड़े अभिनेता एक मुकाम पर पहुंचने के पश्चात भी असफल जीवन जीने को मजबूर है। 

इसलिए निर्माण रिटेल होल्डिंग्स का टीम लीडर, डीएलओ नजफगढ़ शाखा के होने के नाते आप सबसे कह रहा हु।

आज की कामचोरी कल की बर्बादी है। 

आज की मेहनत कल का उज्जवल भविष्य है। 


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