मोहब्बत हो तो ऐसी वर्ना ना हो
मोहब्बत हो तो ऐसी वर्ना ना हो
यूं तो मैं कोई मशहूर शायर नहीं हूं पर,
मैं आपके सामने कुछ अर्ज करना चाहती हूं।
जाम छलकने के बाद जो नशा होता है ना,
मैं वैसी ही एक मोहब्बत बनना चाहती हूं।
मैं चाहती हूं कि तलब बन जाऊँ कुछ ऐसी,
जिसे नशे भी भुला पाना नामुमकिन हो।
मुझे देखते ही वो अपनी शराब छोड़ दे,
बस ऐसा ही कोई मासूम सा दिल हो।
मैं बनना जाऊंगी वो बर्फ का टुकड़ा जो,
तेरे नशे की घूंट में खुद ही पिघल जाऊंगी।
अगर देर हुई भी तो क्या तेरे नशे,
पिघल कर तुझमें ही है मैं घुल जाऊंगी।
मैं नहीं कहूंगी तुम नशा मत किया करो,
शर्त है कि नशा मेरे प्यार का होना चाहिए।
जिसे हर बात हँसकर टालना आता हो,
वो ऐसा ही एक यार होना चाहिए।
नशा तेरा होगा पर मोहब्बत मेरी होगी,
और दोनों का एक नया हाल होगा।
तुझे देख शराबी खुद शराब छोड़ देंगे,
बस यही हमारी मोहब्बत का मिसाल होगा।
मिसाल हो ऐसी कि दिल में दर्द हमारे हो,
तो आँसू लोगों की आँखों में होना चाहिए।
हमें जब भी देखे लोग तो खुद ही कहें कि,
मोहब्बत हो तो ऐसी वर्ना ना होनी चाहिए।

