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सोनी गुप्ता

Tragedy

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सोनी गुप्ता

Tragedy

प्रकृति का खौफ

प्रकृति का खौफ

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जब -जब मानव ने उत्पात मचाया

तब -तब जीवन में संकट है आया

सुंदर रूप था इस धरा का

रंग -बिरंगे फूलों का उपवन

सबका होता खुशहाल जीवन

जब -जब मानव ने उत्पात मचाया

तब -तब जीवन में संकट है आया


आज धरती माँ चीख उठी है

कर रही रौद्र रूप धारण

धरती की ऐसी हालत

किसी से नहीं छिपी है

कलयुग में बढ़ गया अपराध

जब -जब मानव ने उत्पात मचाया

तब -तब जीवन में संकट है आया


समय समय पर चेताया है

प्रकृति को पहुँचाना चोट

घातक है, यह बताया है

खुद की कब्र खोद रहा

प्रकृति के खौफ से

बेफिक्र है हर इंसान

जब -जब मानव ने उत्पात मचाया

तब -तब जीवन में संकट है आया



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