गुमनाम नाम...
गुमनाम नाम...
इक छोटी सी फरियाद है तुझसे
हो गयी है मोहब्बत तुझसे
दीदार तेरा इश्क़ ए करम है
हो गयी है मोहब्बत जो तुझ से...
तू चाँद सा है मेरे लिये
सौ चाँदनियों से बढ़ कर
सौ मरतबा मोड़ दूं साँसे
कभी एक नजर जो देख ले मुड़कर...
पर कैसे बताऊँ तुझे
इस दिल का फसाना
दिल की चुप्पी में फंस गया
तेरे इश्क़ का दीवाना...
किसी चांदनी रात में
मेरे प्यार की चुनर ओढ़ लेना
मेरी हसरत में छुपा
वो गुमनाम नाम पढ़ लेना...
मेरी हसरत में छुपा
वो गुमनाम नाम पढ़ लेना..

