माता सिद्धिदात्री
माता सिद्धिदात्री
माता सिद्धिदात्री |ब्रम्हांड जननी
रूप ते नयनी | सदा असो १
नामोल्लेख तव |ग्रंथामध्ये मिळे
दैन्य दूर पळे | तुझ्या नामे २
सिद्धि सर्वा देई| असो नारी नर
कृपा निरंतर | असो नित्य ३
करिता पुजन | सिद्धी प्राप्त होते
मन शांत होते |तुझ्या मुळे ४
चतुर्भुजा देवी | चक्र, गदा, करि
धारण तु करी | सिद्धिदात्री ५
विराजमान तु | कमल पुष्पात
जाणते मनात | काय असे ६
उपासना नित्य | माते मी करीतो
सुमन अर्पितो |दास म्हणे ७
