टीम लीडर डीएलओ मान सिंह नेगी
टीम लीडर डीएलओ मान सिंह नेगी
पुष्पा कल ही रोशन का रहा था। सर जीवन में आप सिर्फ काम और काम के पीछे ही पड़े रहना।
पुष्पा ने पूछा वह ऐसा क्यों कह रहा था।
मैंने कहा वह कह रहा था। आप रिश्ते बनाना नहीं चाहते। आप सिर्फ काम को ही तवज्जोह देते हैं। आप सिर्फ काम काम और काम को लक्ष्य मानकर चलते हैं।
जबकि जीवन में काम की अपनी जगह है। संबंधों की अपनी जगह है।
पुष्पा ने कहा वह कह तो सही रहा था। मैंने कहा शायद मैं काम का दीवाना हूं। शायद मैं सीधी और स्पष्ट बातें करना जानता हूं। इसीलिए मेरी बातें नीम या कुनीन की गोली से भी ज्यादा कड़वी होती है।
पुष्पा ने कहा ठीक है आप काम को प्राथमिकता देते हैं। परंतु टीम से संबंध बनाना भी आपका ही दायित्व है।
मैंने कहा पुष्पा में अपनी टीम को इतना प्रेरित करता हूं। सिर्फ यह जताने के लिए मैं उनका टीम लीडर डीएलओ मानसिंह नेगी हूं।
मैं यह कभी नहीं सोचता मैं इतने बड़े पद पर बैठा हुआ हूं। मैं कभी भी यह नहीं सोचता यह मुझसे छोटे है।
परंतु कहीं ना कहीं कुछ फासला अवश्य रखना पड़ता है।
मेरी अम्मा जो पास में ही बैठी थी। वह तुरंत बोल उठी बेटा काम का दीवाना ना हो। टीम से अच्छे संबंध बना।
कल यह टीम का कोई सदस्य कहीं भी जरूरत पड़ने पर तुम्हारा साथ अवश्य देगा।
काम का क्या है वह वहीं खड़ा रहेगा। चेहरे बदलते चले जाएंगे।
जरूरी नहीं कंपनी आपके काम की सराहना करें। परंतु बेटा यह याद रखना अनजाने में ही सही टीम के सदस्य का दिल दुखा दिया। तो उसे संभालना मुश्किल होगा।
बेटा काम में इतने व्यस्त ना हो जाना अपने टीम के सदस्यों को जाने अनजाने में ही सही अपनी खट्टी मीठी जुबान से उनका हृदय छलनी मत कर देना।
मैं कुछ कह पता उससे पहले ही पुष्पा ने कहा अम्मा की सलाह सदैव याद रखना।
मैंने कहा जानता हूं इसीलिए टीम के सदस्यों को समझाता हूँ कर्म प्रधान जीवन में अपने शरीर में काम के प्रति निष्ठा पैदा करो। काम के प्रति वफादार रहो।
मैं कुछ आपसे कह दूं उससे पहले आप अपनी जिम्मेदारी को समझो।
मैं किसी को दुख नहीं पहुंचाना चाहता। मैं घमंडी भी नहीं हूं। परंतु कोई यदि अपनी अनचाही मांग से मुझे झुकना चाहे वह मुझे बर्दाश्त नहीं है।
अम्मा मैं जानता हूं मैं अपने काम से प्यार करता हूं। मैं चाहता हूं मेरी टीम शाम को सहयोग ना करें। तब भी कोई बात नहीं।
परंतु मेरी टीम को सुबह सहयोग करना ही होगा। यदि वह सुबह मेरे काम में सहयोग नहीं करती। वह बात मेरी समझ से परे हो जाती है।
अम्मा मैं भी उनका दुश्मन नहीं हूं। मैं उनसे भी उतना ही प्रेम करता हूं जितना अपने आप से करता हूं।
अम्मा मैं उन्हें समझाता हूं मैं अपने लिए इतनी मेहनत नहीं कर रहा।
मैं उन्हें समझाता हूं टीम लीडर डीएलओ मानसिंह नेगी की सलाह पर आप अपना छोटा या बड़ा सहयोग करते हो तब भी कंपनी का काम बेहतर ढंग से एवं समय से पूर्व समाप्त हो जाएगा।
मैं उन्हें समझाता हूं कंपनी को आप अपने 10 से 20 मिनट देते हो।
तब आपसे बड़ा कोई भी टीम का सदस्य नहीं हो सकता।
आप यह अच्छी तरह समझ ले। मेरे दिल में सिर्फ टीम की भलाई छिपी हुई है।
परंतु टीम के अधिकतर सदस्य काम में सहयोग करने से बचते हैं।
इसीलिए मेरा खुशनुमा माहौल भी काम बिगाड़ने वाले टीम सदस्यों के प्रति कहीं ना कहीं मन में छिपा, दबा क्रोध अग्नि से तीव्र जल कर उन्हें डांट रूपी भस्म करने के लिए पर्याप्त है।
अम्मा मेरी लड़ाई सिर्फ और सिर्फ काम को देखते हुए ही होती है। मेरा टीम के किसी भी सदस्य से 36 का आंकड़ा नहीं है।
मैं अपनी ताकत अपना टाइम मैनेजमेंट अपने डिसिप्लिन अपने नर्म व्यवहार को देखते हुए कह सकता हूं।
मेरा जैसा टीम लीडर डी एल ओ पूरे निर्माण रिटेल होल्डिंग्स ग्रुप में नहीं है।
मैं टीम की बेहतरी के लिए स्वयं से कार्य करने बैठ जाता हूं।
मैं टीम को जब तब समझाता रहता हूं। मैं टीम को बेहतर से बेहतरीन बनाने का प्रयास निरंतर करता रहता हूं।
जबकि टीम के सदस्य यह समझते हैं। वह कंपनी द्वारा इनाम प्राप्त कर लेगा।
जबकि मैं उन्हें यह भी समझा चुका हूं कप्तान एक ही होता है। टीम लीडर डीएलओ एक ही होता है।
परंतु विजय इनाम पारितोषिक पूरी टीम को प्राप्त होता है।
अम्मा ने कहा बेटा तेरी सारी बातें मुझे स्वीकार है।
परंतु इन सबके बावजूद रोशन ने जो तुमसे कहा था। वही बात मैं भी कह रही हूं। इस पूरी आपा धापी में कहीं ना कहीं तुम टीम के सदस्यों से मधुर संबंध बनाने में अनजाने में ही सही भूल रहे हो।
बेटा काम और संबंध में यदि एक को चुनना हो। तब संबंध को मधुर संबंध को चुनना आवश्यक हो जाता है।
क्योंकि काम तब भी नहीं रुका था। जब कंपनी के दोनों डीएलओ कार्यालय नहीं पहुंचे थे।
याद रहे टीम के सदस्यों से मधुर संबंध आपके कार्य में भी चार चांद लगा देंगे।
मैंने कहा अम्मा आपकी सलाह सर आंखों पर। मैं अपने आपको आपकी सलाह के अनुसार अवश्य बदलूंगा।
मैं अपनी टीम के सदस्य और अपने काम के प्रति नर्म व्यवहार रखूंगा।
मैं उनसे मधुर संबंध बनाऊंगा। जिससे वह काम के प्रति उत्साहित रहे।
अम्मा ने कहा शाबाश बेटा तुमसे यही उम्मीद थी।
भगवान राधे कृष्ण आपको दिन दुगनी रात चौगुनी सफलता दे।
इतिश्री
