Dr Jogender Singh(jogi)

Romance


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सीता भाग 4

सीता भाग 4

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"आलू की सैंडविच बना दीजिए " परी मुँह बिचका कर मुझ से बोली। मैं यानी आप की अपनी सीता।

"अभी बनाती हूँ बिटिया " मैं डरते हुए बोली। अब यह सैंडविच कैसे बनेगी। यूट्यूब पर देख लेती हूँ, चँदर ने मुझे यूट्यूब देखना सिखा दिया। फ़्रिज की आड़ लेकर मैंने आलू सैंडविच बनाने की विधि देखनी शुरू की, धीमी आवाज़ में। 

लाइए, भूख लगी है। परी ने आवाज़ दी। 

अभी लाई बेटा, मोबाइल बंद कर मुड़ी तो समीर सामने खड़े थे। 

मैं आप को बताता हूँ कैसे बनाई जाती है। आलू फोड़ लीजिए, नमक, मसाला डाल लीजि , थोड़ी सी टोमेटो सॉस भी ( परी को पसंद है ) ब्रेड पर हल्का सा मक्खन लगा लीजिए। बस स्टफ़िंग रख कर दूसरी ब्रेड लगा लीजिए। अब सैंडविच मेकर में लगा दीजिए। शाम को आप के लिए एक कुकरी बुक भी लेता आऊँगा। मुझे भी दे दीजिए नाश्ता। 

जी !! मेरा मन समीर जी के यहाँ लग गया था, बस परी अभी मुझे पसंद नहीं करती थी। 

चँदर के साथ जब पहली बार समीर जी के घर आयी। मेरी आँखें फटी रह गयी थी। इतना बड़ा घर वो भी एकदम साफ़ / सुथरा। इतने बड़े घर में दो ही लोग मैंने चँदर की तरफ़ डर से देखा। 

नहीं दीदी, समीर सर की मम्मी भी रहती हैं यहीं पर। आजकल अपनी बेटी के पास गयी हैं महीने भर के लिए। और नौकर लगे हैं, बस उनको एक ईमानदार, घरेलू सुपरवाइज़र की ज़रूरत है। इसलिए आप को बुलाया है। सुबह का नाश्ता आप को बनाना है, खाना बनाने वाली दिन और रात का खाना बनाएगी। आप सब सम्भाल लोगी, मुझे पूरा विश्वास है। 

मैं घबराई तो थी, पर फिर ठाना करके देखती हूँ। दो महीने में ही मैं सारा काम सीख गयी। माँ जी ने भी मुझे अपना बना लिया। बस परी मुझ से उतना खुश नहीं थी। मैं ख़ाली समय में पढ़ाई करती रहती, रात का खाना चँदर के साथ घर पर ही खाती। सपनों की दुनिया ही तो थी मेरे लिए गाँव से चंडीगढ़ तक का सफ़र। 

परी के होमवर्क में भी मैं उसकी मदद करने लगी। 

भगवान ने दिमाग़ तेज दिया मुझे। परी को कहानियाँ सुनाती रोज़ नयी अपनी बनाई हुई। परी मेरी दोस्त बनती जा रही है। बच्चों का मन जीतना सबसे आसान है, प्यार सच्चा होना चाहिए। खोट को बच्चे तुरंत पकड़ लेते हैं।

उस दिन जब माँ जी के बालों में तेल लगा रही थी। माँ जी ने मुझे सामने बिठा कर मेरा हाथ पकड़ लिया।" समीर कैसा लगता है तुम्हें ? 

वो बहुत अच्छे इंसान हैं, माताजी। 

अरे वैसे नहीं, देख मैं चाहती हूँ तू उसको पूरा सम्भाल ले। माँ जी मुस्कुरा रही थी, उनकी आँखों में रंग / बिरंगे सितारे थे। 

ऐसा कैसे हो सकता है माँ जी, मुझे विश्वास नहीं हो रहा था। "कहाँ समीर जी और कहाँ मैं, राजा भोज गंगू तेली की कहावत एकदम सटीक।" मैं मन ही मन सोच रही थी।

देख सीता, तुम भी ब्राह्मण और हम भी ब्राह्मण। मेरा बेटा सोना है, तो तू हीरा। और परी भी तुम्हें पसंद करने लगी है। 

मुझे थोड़ा समय दीजिए माँ जी, चँदर से बात कर लूँ। मैं अपनी धड़कनों को क़ाबू करने की कोशिश कर रही थी। आप समीर जी से भी पूछ लीजिए। 

तू हाँ कर बस। चँदर और समीर तो बहुत पहले से तैयार हैं, तुझे इसीलिए तो बुलाया था। मैंने इतने दिनों में देख लिया, तुझ से अच्छी माँ परी को नहीं मिल सकती। 

जी माँ जी, मेरी आँखों से आँसू बहने लगे, हे भगवान तेरी माया। 

चल तेल लगा, बहू बन जाएगी तो क्या मेरे बाल रूखे रखेगी ? माँ जी लाड़ से बोली।

 नहीं माँ जी। मैं उनके बालों को सींचने लगी तेल से कम और अपने आँसुओं से ज़्यादा। ख़ुशी में भी इतने आँसू निकल सकते है, यह उस दिन पता चला।

"लाओ भई, चाय बना रही हो या बीरबल की खिचड़ी। " समीर ने आवाज़ लगाई। 

"माँ, मुझे भी चाय पीनी है" परी बोली।

नहीं, तुम्हें दूध ही मिलेगा, अभी छोटी हो ना तुम। मैंने प्यार से उसके गाल को थपथपाया।



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