केसरिया उमापति

Abstract Romance Tragedy


4.5  

केसरिया उमापति

Abstract Romance Tragedy


शराब और इश्क़

शराब और इश्क़

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ठक-ठक ठक-ठक। रात लगभग 11.30 बजे दरवाजा पीटने पर वह आई और जब दरवाजा खोला तो श्याम लड़खड़ाते हुए सीधा उसके कंधे पर झूल गया। उसने काफी पी रखी थी और लगातार बड़बड़ाता जा रहा था। अपने पति को ऐसे हाल में देख उसे तो पहले भरोसा नहीं हुआ, किंतु फिर भी वह उसे किसी तरह सहारा देकर बिस्तर तक ले आई। श्याम कभी पीता नहीं था, पर पता नहीं क्यों ? हो सकता है आज दोस्तों ने उसे जबरदस्ती पिला दी हो।

यह सोचते हुए उसने दरवाजा बंद कर दिया। इधर श्याम भी कुछ ज्यादा ही नशे में था। बिस्तर पर उसकी पाँच साल की बेटी और दो साल का बेटा गहरी नींद में सो रहे थे। श्याम के मुँह से शराब की तेज बू आ रही थी, किन्तु उसने उसे दरकिनार कर उसके बगल में बिस्तर पर लेट गई। उसके लेटते ही श्याम ने अपना एक हाथ उसके कमर पर रख दिया और बड़बड़ाते हुए कहने लगा –

“ अनु ! यार मुझे पता है तू मुझसे नाराज़ है पर मेरी मजबूरी समझा कर तुम्हें मैं आज भी बहुत प्यार करता हूँ, पर तुम्हें बता नहीं सकता कैसे बताऊँ.?” यह बात सुन पहले उसे तो आश्चर्य का ठिकाना ना रहा, उसका गुस्सा भी सातवें आसमान पर था, किन्तु मन मसोसकर उसकी बातों को सुनती रही।

ऐ अनु ! तू सुन रही है ना, श्याम बड़बड़ाता ही जा रहा था? उसने 'हम्म' में जवाब दिया। आज तक मैंने तुझे कभी कुछ नहीं कहा, चुप रहा पर एक बात बताओ, अनु! बोलो न, तुम चुप क्यों हो? उसने नेत्रों में जल भरकर हम्म कहा, तो श्याम रोते हुए बोला – ‘ऐ अनु ! ये दर्द कम काहे नहीं होता है रे ?’ यह कहते हुए वह जोर-जोर से रोने लगा। श्याम को देख उसके भी गोरे गाल पर नैन जल की बारिश होने लगी।

श्याम आगे बोलना जारी रखा – ‘सुनो अनु ! एक बार मुझे अपने सीने से लगाओ न! बहुत साल हो गए रे तेरी आँचल में सोए हुए। मुझे सुला लो न अपनेआँचल में।’ उसने अपना आँचल उठाया और श्याम के सर पर रख उसे अपने पहलू में समेट लिया। श्याम भी एक बच्चे की भाँति अपनी बीवी से लिपटकर बड़बड़ाते हुए सो गया।

सुबह हुई। रोज की तरह श्याम तैयार होकर काम पर जाने को हुआ। इधर उसकी बीवी अपनी बेटी अनुपमा को स्कूल के लिए तैयार कर रही थी। श्याम उसके पास आया और कहा – ‘सुनो। मैं जा रहा हूँ। रात में मैं कुछ ज्यादा पी लिया था। वो क्या है कि जिंदगी में कभी पिया नहीं तो थोड़ी चढ़ गई थी। और वो पार्टी थी न मनोज की तो। रात में पता नहीं मैंने तुम्हें क्या-क्या कह दिया। सॉरी! और हाँ आई लव यू टू मच, कहते हुए उसने बीवी को जोर से गले लगाते हुए माथे को चूम लिया और घर से बाहर निकल गया। श्याम अपनी बीवी ओर बच्चों का खूब ख्याल रखता था और उनपर अपनी जान छिड़कता था। कुछ देर बाद उसने अपनी बेटी को तैयार किया और घर के सामने स्कूल बस में बिठाकर वापस आ गई। मोबाइल निकाला और नम्बर मिलाया (जिसे चुपके से श्याम के मोबाइल से उसने निकाला था)।

उधर से हैलो की आवाज़ के बाद उसने बोला – ‘हाय! रूपा, कैसी हो? कहाँ हो?’ उधर से आवाज आई, हेलो कौन? आपको किससे बात करनी है? इधर से इसने जवाब दिया – ‘जी, ये रुपा का नम्बर नहीं है?’ नहीं, उधर से आवाज आई। वैसे आप कौन बोल रही हैं और ये फ़ोन कहाँ लगा है, इसने फिर पूछा ? जी, मैं अनु बोल रही हूँ और मैं गाज़ियाबाद से बोल रही हूँ, उधर से जवाब आया। कुछ देर तक राँग नम्बर की तरह बात करने के बाद इसने माफी मांगी और फ़ोन रख दिया। अपने कमरे के अंदर जाकर दरवाजा बंद कर उससे सटकर सिसक- सिसककर खूब रोई। उसे ये समझ नहीं आ रहा था कि जिस इंसान ने अपनी पूर्व प्रेयसी के बारे में इतने सालों तक नहीं बताया, एक शराब की बोतल ने बता दिया, कैसे ?


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